UPI चार्ज पर नीति आयोग के वीसी का बयान, बोले- 40 पैसे देने से क्या जान चली जाएगी? सरकार बिना टैक्स के नहीं चलती

नई दिल्ली: 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से अधिक के कुछ कारोबारी UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने वाला है। इस फैसले को लेकर बहस के बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार बिना कर या राजस्व के नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि लोगों को व्यवस्था चलाने की लागत में योगदान देना चाहिए। लाहिड़ी ने साफ किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, नीति आयोग का आधिकारिक रुख नहीं।
‘हर ट्रांजैक्शन पर हमेशा सब्सिडी नहीं दी जा सकती’
अशोक लाहिड़ी ने नए UPI शुल्क पर बात करते हुए कहा कि सरकार हर लेनदेन पर अनिश्चितकाल तक सब्सिडी नहीं दे सकती। उनका कहना था कि लोगों को अलग-अलग सेवाओं के लिए टैक्स और शुल्क देना पड़ता है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि सरकार को भी अपने संचालन के लिए राजस्व की जरूरत होती है।
चाणक्य नीति का दिया उदाहरण
लाहिड़ी ने अपनी बात समझाने के लिए चाणक्य नीति का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि राजा को प्रजा से कर उसी तरह लेना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूल को नुकसान पहुंचाए बिना धीरे-धीरे शहद इकट्ठा करती है।
उनके मुताबिक, कर या शुल्क ऐसी व्यवस्था में होना चाहिए जिससे आर्थिक गतिविधियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े और व्यवस्था भी चलती रहे।
‘40 पैसे देने से मर जाओगे क्या?’
न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहिड़ी ने बड़े UPI लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क की तुलना बैंकिंग सेवाओं से करते हुए कहा कि 100 रुपये के लेनदेन पर 40 पैसे का शुल्क बहुत मामूली है। उन्होंने सवाल किया कि क्या 40 पैसे देने से किसी की जान चली जाएगी। उनके मुताबिक, व्यवस्था को चलाने की लागत होती है और लोगों को धीरे-धीरे इसकी आदत हो जाएगी।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा
नए ढांचे के तहत 2000 रुपये से अधिक के सामान्य व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। वहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सरकार और NPCI के नए ढांचे में कुछ आवश्यक सेवाओं और विशेष श्रेणियों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। ग्राहकों से सीधे UPI शुल्क वसूलने का प्रावधान नहीं है।
UPI शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नए MDR ढांचे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR व्यवस्था को चुनौती दी गई है। याचिका में दावा किया गया है कि अतिरिक्त लागत का बोझ कारोबारियों के जरिए अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। याचिकाकर्ता ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग भी की है।



