मध्य प्रदेशराज्य

राम मंदिर विवाद पर दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान: ‘दान देने वाले भक्तों को लगा झटका’, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर जताई चिंता

भोपाल: अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने वाले लाखों श्रद्धालु इन आरोपों से निराश और आहत हैं।

भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के लोगों ने श्रद्धा के साथ दान दिया था। ऐसे में ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आने से लोग हैरान और स्तब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद ने करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को प्रभावित किया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी किया दावा

मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने यह भी दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अभी भी राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। हालांकि ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान 15 सदस्यीय ट्रस्टी मंडल में उनका नाम शामिल नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार अपने पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहते हुए ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना के समन्वय से जुड़े थे। लेकिन वर्तमान में ट्रस्ट के भीतर उनके किसी सक्रिय पद पर होने की जानकारी नहीं है।

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ट्रस्ट के सदस्य नहीं हैं।

अखिलेश यादव ने सबसे पहले उठाया था मामला

राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों का मुद्दा 7 जून को चर्चा में आया था। समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर के लिए दान में मिली करोड़ों रुपये की राशि गायब हो गई है।

उन्होंने इस पूरे मामले में न्यायालय से हस्तक्षेप करने और मामले का संज्ञान लेने की मांग भी की थी। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।

ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित हुई एसआईटी

विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। राज्य सरकार के अनुसार, यह कदम ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया, ताकि दान राशि की कथित चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जा सके।

सरकार का कहना है कि ट्रस्ट ने तथ्यों को सामने लाने और मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचाने की संभावित कोशिशों की भी जांच की मांग की थी।

महासचिव और प्रशासक से हुई पूछताछ

जांच के क्रम में विशेष जांच दल ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। टीम ने दान राशि की गणना और वित्तीय रिकॉर्ड के रखरखाव से जुड़े अन्य लोगों के भी बयान दर्ज किए।

इस बीच मामले को लेकर तीन अलग-अलग व्यक्तियों ने विभिन्न पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। हालांकि अब तक किसी भी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों और चल रही जांच पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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