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केदारनाथ में ‘कैरी मी बैक’ अभियान बना मिसाल! श्रद्धालु खुद उठा रहे कचरा, अब तक 2 टन प्लास्टिक पहुंचा गौरीकुंड

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘कैरी मी बैक’ अभियान अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल को यात्रियों का व्यापक सहयोग मिल रहा है और इसी का परिणाम है कि अब तक श्रद्धालु धाम क्षेत्र से लगभग दो टन प्लास्टिक एवं अन्य गैर-जैविक कचरा वापस गौरीकुंड तक लेकर आ चुके हैं।

यात्रियों की भागीदारी से अभियान को मिली रफ्तार

जिला प्रशासन के निर्देशन में संचालित इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे अपने साथ ले जाई गई पानी की खाली बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य प्लास्टिक कचरे को धाम में न छोड़ें, बल्कि वापस गौरीकुंड तक लेकर आएं। इस पहल का सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

अभियान में स्थानीय निकायों, सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है। यात्रा मार्ग और केदारनाथ धाम क्षेत्र में तैनात कर्मचारी लगातार यात्रियों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

हिमालय संरक्षण का प्रभावी मॉडल बना अभियान

जिला प्रशासन का मानना है कि ‘कैरी मी बैक’ अभियान जनभागीदारी आधारित कचरा प्रबंधन का एक सफल और प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। यात्रियों से लगातार यह आग्रह किया जा रहा है कि वे हिमालय की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं और कचरे को वापस निर्धारित स्थानों तक पहुंचाएं।

बदरीनाथ में कूड़े से बढ़ रही आय

उत्तराखंड के दूसरे प्रमुख तीर्थस्थल बदरीनाथ धाम में भी कचरा प्रबंधन को आय के स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है। यात्रा सीजन के दौरान यहां प्रतिदिन करीब तीन टन कचरा निकल रहा है।

कचरे को गीले और सूखे हिस्सों में अलग कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है, जबकि प्लास्टिक कचरे को संसाधित कर उपयोगी ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष मशीनों और डोर-टू-डोर संग्रहण व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है।

गंगोत्री में खाद बन रही, मशीन बंद पड़ी

गंगोत्री धाम से एकत्रित कचरे को निर्धारित स्थल तक पहुंचाकर कंपोस्ट प्लांट में जैविक खाद तैयार की जा रही है। हालांकि कूड़ा निस्तारण के लिए स्थापित एक आधुनिक मशीन फिलहाल बंद पड़ी है, जिससे उसकी उपयोगिता प्रभावित हुई है।

यमुनोत्री में रोज निकल रहा 10 टन तक कचरा

यमुनोत्री धाम में यात्रा सीजन के दौरान प्रतिदिन लगभग 10 टन कचरा निकल रहा है। पैदल मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे की चुनौती बनी हुई है। जिला पंचायत के कर्मचारी इस कचरे को एकत्र कर निर्धारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र तक पहुंचाते हैं, जहां उसका निस्तारण किया जाता है।

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