
नई दिल्ली: हाल ही में 27 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति उच्च सदन में और मजबूत होती नजर आ रही है। नए नतीजों के साथ गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है, हालांकि अभी यह आंकड़ा हासिल नहीं हुआ है।
TMC में हलचल से बढ़ा राजनीतिक असर
राज्यसभा के मौजूदा समीकरणों में बदलाव का बड़ा कारण तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक अस्थिरता को माना जा रहा है। पार्टी के 13 सांसदों में से 4 के इस्तीफे के बाद संख्या घटकर 9 रह गई है। इस्तीफा देने वाले सांसदों में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक के नाम शामिल हैं। इन इस्तीफों के बाद खाली हुई सीटों पर भविष्य में होने वाले राजनीतिक बदलावों से एनडीए को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यसभा का मौजूदा गणित
ताजा आंकड़ों के अनुसार हालिया चुनावों में NDA ने 27 में से 19 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में गठबंधन की कुल संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। बहुमत का आंकड़ा 164 है, जिससे NDA अभी भी लक्ष्य से कुछ सीटें दूर है।
भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई
मौजूदा स्थिति में भारतीय जनता पार्टी 115 सांसदों के साथ राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 4-4 सांसद हैं। शिवसेना के 2, जनसेना पार्टी के 1, जबकि 7 नामांकित सदस्य और 4 निर्दलीय सांसद भी सदन में मौजूद हैं।
भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर नजर
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि टीएमसी के कुछ और सांसदों के इस्तीफे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा होता है तो राज्यसभा के समीकरण और तेजी से NDA के पक्ष में जा सकते हैं।
नए समर्थन से और मजबूत हो सकता है NDA
इस बीच मिजोरम से राज्यसभा सदस्य चुने गए के. लालतलुआंगकिमा ने संकेत दिया है कि वह राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों पर NDA का समर्थन करेंगे। उनकी पार्टी ZPM न तो NDA का हिस्सा है और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन का। ऐसे में उनका रुख भी आने वाले समय में सदन के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।



