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PoK में गहराया संकट! विरोध प्रदर्शनों के बीच राशन, दवा और ईंधन की किल्लत, हजारों लोगों का सरकार के खिलाफ गुस्सा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी आंदोलन के बीच आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी दलों के आरोपों के अनुसार, क्षेत्र में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों और ईंधन की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई इलाकों में मानवीय संकट जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, पुंछ, बाग और नीलम घाटी सहित कई क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं की कमी महसूस की जा रही है। स्थानीय निवासियों और ट्रक चालकों का दावा है कि आवश्यक सामान लेकर आने वाले वाहनों को विभिन्न चौकियों पर रोका जा रहा है। हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन ने किसी भी तरह की आधिकारिक नाकेबंदी से इनकार किया है, लेकिन कई स्थानीय रिपोर्टों में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।

सामान से लदे ट्रकों की आवाजाही पर असर

स्थानीय मीडिया के अनुसार, कई लोगों ने पड़ोसी क्षेत्रों से स्वयं राशन और दवाएं खरीदकर लाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी विभिन्न स्थानों पर रोकने की शिकायतें सामने आई हैं। आजाद पट्टन और फगवारी क्षेत्रों में व्यावसायिक ट्रकों तथा निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें हैं।

इसका असर यह हुआ है कि बड़ी संख्या में वाहन लंबे समय से मार्गों पर खड़े हैं, जबकि खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।

लोगों ने बयां की रोजमर्रा की मुश्किलें

स्थानीय निवासी नवीद ने दावा किया कि वह रावलपिंडी से राशन और जरूरी दवाएं खरीदकर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में उनकी गाड़ी रोक दी गई। उन्होंने कहा कि परिवार की जरूरतों के बावजूद उन्हें सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं मिली।

वहीं नीलम घाटी के निवासी अलिफ दीन ने बताया कि कई दिनों से सरकारी डिपो में आटा उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद राशन नहीं मिल रहा, जबकि खुले बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

दवाइयों और पेट्रोल की किल्लत से बढ़ी चिंता

मुजफ्फराबाद के निवासी मोहम्मद मकीन ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए आवश्यक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई मेडिकल स्टोर और फार्मेसियां पिछले दो सप्ताह से बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों की परेशानियां बढ़ गई हैं।

इसके अलावा पुंछ और मुजफ्फराबाद के कई पेट्रोल पंपों पर भी आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें हैं। सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को अधिक कीमत चुकाकर ईंधन खरीदना पड़ रहा है।

सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोप

स्थानीय अखबारों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रावलाकोट में चल रहे धरने को कमजोर करने के लिए प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने वाली रसद और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सीमित की जा रही है। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और किसी भी तरह की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से इनकार किया है।

12 आरक्षित सीटों को लेकर भड़का विवाद

आंदोलन की मुख्य वजह PoK विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को लेकर उठे विवाद को माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल स्थानीय राजनीति और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।

इसी मुद्दे को लेकर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। साथ ही इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।

आंदोलन में बढ़ रही लोगों की भागीदारी

विरोध प्रदर्शनों के बावजूद आंदोलन कमजोर पड़ने के बजाय और मजबूत होता दिखाई दे रहा है। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो सप्ताह के दौरान 70 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

JAAC नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक एक लाख लोगों की विशाल रैली निकाली जाएगी। दूसरी ओर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की PoK इकाई ने भी सरकार की आलोचना करते हुए लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने के आरोप लगाए हैं।

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