90 करोड़ का हाईटेक कायाकल्प! पटना का बांस घाट बना एशिया का सबसे बड़ा VIP मोक्षधाम, एक साथ 18 अंतिम संस्कार की सुविधा

पटना: बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक बांस घाट अब पारंपरिक श्मशान घाट की पहचान से आगे बढ़कर देश के सबसे आधुनिक और एशिया के सबसे बड़े वीआईपी मोक्षधामों में शामिल हो गया है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस हाईटेक अंतिम संस्कार केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एक समय में 18 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। परिसर में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, ऑनलाइन बुकिंग, इलेक्ट्रिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की शवदाह व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
नई व्यवस्था के तहत अंतिम संस्कार की लागत भी बढ़ी है। यहां एक शव के अंतिम संस्कार पर लगभग 3500 से 5000 रुपये तक खर्च आ सकता है। पूरे परिसर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी ईशा फाउंडेशन को सौंपी गई है।
89.40 करोड़ की लागत से बदली बांस घाट की तस्वीर
पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने लगभग 89.40 करोड़ रुपये की लागत से बांस घाट श्मशान का व्यापक पुनर्विकास कराया है। पहले यह परिसर करीब 1.24 एकड़ क्षेत्र में फैला था, जिसे बढ़ाकर अब 4.5 एकड़ तक विकसित किया गया है। आधुनिक वास्तुकला, स्वच्छता, हरित वातावरण और तकनीकी सुविधाओं से लैस यह परिसर अब देश के सबसे उन्नत अंतिम संस्कार केंद्रों में गिना जा रहा है।
एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था
नए मोक्षधाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल क्षमता है। यहां 4 इलेक्ट्रिक ओवन, 6 वुड क्रिमेशन ओवन और 8 पारंपरिक चिता स्थल तैयार किए गए हैं। इससे एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार संभव हो सकेगा और परिजनों को लंबी प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
5000 रुपये तक पहुंच सकता है अंतिम संस्कार का खर्च
आधुनिक सुविधाओं से लैस इस केंद्र में अंतिम संस्कार के लिए न्यूनतम शुल्क 3500 रुपये निर्धारित किया गया है। यदि पंडित, डोम और अन्य आवश्यक सेवाओं का खर्च जोड़ दिया जाए तो कुल राशि करीब 5000 रुपये तक पहुंच सकती है। लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने वालों को लकड़ी का शुल्क अलग से देना होगा।
एसी वेटिंग हॉल और आधुनिक मोर्चरी की सुविधा
परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर में दो वातानुकूलित प्रतीक्षालय बनाए गए हैं। शवों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक मोर्चरी और फ्रीजर की व्यवस्था भी की गई है। बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए अलग स्थान विकसित किया जा रहा है ताकि शवों को गंगा में प्रवाहित करने की आवश्यकता न पड़े।
ऑनलाइन बुकिंग और व्हाट्सऐप से मिलेगा स्लॉट
अब अंतिम संस्कार के लिए लोगों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। नगर निगम की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन स्लॉट बुक किया जा सकेगा। साथ ही व्हाट्सऐप चैटबॉट की मदद से भी बुकिंग, मुक्ति रथ की व्यवस्था और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। हेल्प डेस्क की टीम पूरे प्रक्रिया में सहयोग करेगी।
42 फीट का मोक्ष द्वार और शिव प्रतिमा आकर्षण का केंद्र
मोक्षधाम को आध्यात्मिक स्वरूप देने के लिए यहां 42 फीट ऊंचे मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार का निर्माण किया गया है। परिसर में 12 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे आदियोगी की अवधारणा पर तैयार किया गया है। 15 फीट ऊंचा त्रिशूल, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और हरियाली इस स्थान को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
दीवारों पर उकेरी गई जीवन से मृत्यु तक की यात्रा
श्मशान की दीवारों पर बनाई गई विशेष चित्रकला इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक के जीवन चक्र को दर्शाती है। चित्रों में कर्म, स्वर्ग-नरक की अवधारणा और राजा हरिश्चंद्र की कथा को भी स्थान दिया गया है। इसके जरिए यहां आने वालों को जीवन मूल्यों और कर्तव्यबोध का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
ईशा फाउंडेशन संभालेगा संचालन
पूरे हाईटेक मोक्षधाम के संचालन की जिम्मेदारी ईशा फाउंडेशन को दी गई है। संस्था अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का संचालन करेगी। इसके अलावा बिहार सरकार ने दीघा में एलपीजी आधारित शवदाह गृह और मुंगेर के तारापुर में धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजना के लिए भी फाउंडेशन को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
बिहार के 40 शहरों में बन रहे आधुनिक शवदाह गृह
राज्य सरकार पूरे बिहार में अंतिम संस्कार सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर काम कर रही है। 40 शहरों में आधुनिक शवदाह गृह विकसित किए जा रहे हैं। इनमें से 20 परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उन्हें आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को सम्मानजनक और सुविधाजनक अंतिम संस्कार व्यवस्था उपलब्ध होगी।



