अन्तर्राष्ट्रीय

चीन में 200 रूसी सैनिकों की गुप्त ट्रेनिंग का दावा, पुतिन के करीबी की मंजूरी का खुलासा; रिपोर्ट से बढ़ी भारत की रणनीतिक चिंता

मॉस्को: रूस और चीन के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों के बीच एक नई गोपनीय रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। दावा किया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान करीब 200 रूसी सैनिकों ने चीन में विशेष सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कथित ट्रेनिंग को रूस के शीर्ष स्तर से मंजूरी मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि चीन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि रूस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव ने एक आंतरिक आदेश के जरिए रूसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल को चीन भेजने की अनुमति दी थी। बताया गया है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम करीब तीन सप्ताह तक चला और इसमें रूस तथा चीन के कम से कम चार वरिष्ठ जनरल भी शामिल रहे। प्रशिक्षण का आयोजन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की सैन्य सुविधाओं में किया गया था।

परमाणु, जैविक और रासायनिक हमलों से बचाव पर फोकस

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित करना था। सैनिकों को परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों की स्थिति में सुरक्षा उपायों, रेडिएशन और रासायनिक निगरानी तकनीकों तथा वेंटिलेशन सिस्टम को प्रदूषण से सुरक्षित रखने के तरीकों की जानकारी दी गई।

बताया गया है कि प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों ने परमाणु रिएक्टर के मॉडल पर व्यावहारिक अभ्यास भी किया। इस दावे ने रूस और चीन के सैन्य सहयोग की गहराई को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

चीन ने आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार

इन दावों के सामने आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इन्हें खारिज कर दिया। चीन की ओर से कहा गया कि इस तरह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

चीन ने एक बार फिर दोहराया कि यूक्रेन युद्ध को लेकर उसका रुख पहले जैसा ही है और वह स्वयं को शांति वार्ता का समर्थक तथा मध्यस्थ मानता है। दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय और क्रेमलिन की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है रणनीतिक चुनौती?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं, तो इसका असर भारत की रणनीतिक और सुरक्षा चिंताओं पर पड़ सकता है। भारत की सशस्त्र सेनाएं आज भी बड़ी संख्या में रूसी सैन्य उपकरणों और हथियार प्रणालियों का उपयोग करती हैं।

ऐसे में रूस और चीन के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी भविष्य में रक्षा आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यूक्रेन युद्ध के बाद और मजबूत हुए रूस-चीन संबंध

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस और चीन के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देशों ने पिछले वर्षों में कई संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं और वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ाया है।

फिलहाल यह भी महत्वपूर्ण है कि यह पूरी जानकारी गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर सामने आई रिपोर्ट पर आधारित है। चीन इन दावों को पहले ही खारिज कर चुका है और कथित प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

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