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संसद सत्र से पहले बदला सियासी गणित! NDA हुआ और मजबूत, INDIA गठबंधन की ताकत घटी; जानिए क्या कहते हैं नए आंकड़े

नई दिल्ली: संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन का संख्याबल कम हुआ है। हालांकि, इसके बावजूद लोकसभा में किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी एनडीए की पहुंच से बाहर बना हुआ है।

दो-तिहाई बहुमत के लिए कितने वोट जरूरी?

लोकसभा में वर्तमान में 540 सांसद हैं। यदि सभी सदस्य सदन में मौजूद रहकर मतदान करते हैं, तो दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 360 मतों की आवश्यकता होगी। इससे पहले अप्रैल में संविधान संशोधन से जुड़े एक विधेयक पर मतदान के दौरान 548 सांसदों ने वोट डाले थे, जिसमें समर्थन में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे। उस समय 11 सांसदों की अनुपस्थिति के कारण दो-तिहाई बहुमत का प्रभावी आंकड़ा घटकर 352 रह गया था।

दल-बदल के बाद NDA की संख्या में बढ़ोतरी

हाल के राजनीतिक घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया। यह दल एनडीए को समर्थन दे रहा है और लोकसभा में अलग पहचान की मांग भी कर चुका है। इसके अलावा शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने भी एनडीए समर्थक शिवसेना का दामन थाम लिया है। इन बदलावों के बाद लोकसभा में एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 319 तक पहुंच गया है।

INDIA गठबंधन को लगा बड़ा झटका

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन के पास 225 सांसदों का समर्थन था, लेकिन हालिया टूट के चलते उसे बड़ा नुकसान हुआ है। 26 सांसदों के अलग होने के बाद गठबंधन का आंकड़ा घटकर 199 पर पहुंच गया है। इसके साथ ही 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) ने भी खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ी दूरी इसके पीछे प्रमुख कारण मानी जा रही है।

कांग्रेस अब भी विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत

INDIA गठबंधन में कांग्रेस 98 सांसदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी हुई है। इसके बाद 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी का स्थान है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के बाद विपक्षी खेमे की राजनीतिक ताकत और प्रभाव दोनों प्रभावित हुए हैं।

क्या NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है?

राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय सांसदों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। पांच निर्दलीय सांसदों में से दो सांसद—अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद—वर्तमान में जेल में हैं। ऐसे में यदि एनडीए को चार सांसदों वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिलता है, तो उसका आंकड़ा और मजबूत हो सकता है।

इसके अलावा यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और डीएमके जैसे दल मतदान से दूरी बनाते हैं, तो दो-तिहाई बहुमत का प्रभावी आंकड़ा घट सकता है। शरद पवार गुट के 8 और डीएमके के 22 सांसदों को जोड़कर देखा जाए, तो उनके मतदान से दूर रहने की स्थिति में बहुमत का लक्ष्य 330 के आसपास पहुंच सकता है। ऐसे परिदृश्य में निर्दलीय सांसदों और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से एनडीए को अतिरिक्त मत मिल सकते हैं, लेकिन तब भी बहुमत के लिए कुछ और समर्थन जुटाने की जरूरत बनी रहेगी।

मॉनसून सत्र से पहले बढ़ी सियासी हलचल

मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले बदले राजनीतिक समीकरणों ने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को नई दिशा दी है। सत्तापक्ष जहां अपनी संख्या बढ़ने से उत्साहित है, वहीं विपक्ष के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बड़ी हो गई है। आने वाले सत्र में विभिन्न विधेयकों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली चर्चा के दौरान यह नया नंबर गेम अहम भूमिका निभा सकता है।

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