मध्य प्रदेशराज्य

MP किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब धान पर भी मिलेगा भावांतर योजना का लाभ, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

भोपाल: मध्य प्रदेश के धान उत्पादक किसानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। अब राज्य में धान की फसल को भी भावांतर योजना का लाभ मिलेगा। इसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार मूल्य के बीच जितना अंतर होगा, उसकी भरपाई राज्य सरकार किसानों को करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार खेत से लेकर बाजार तक किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

धान उत्पादकों को मिलेगा बड़ा फायदा

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र देशभर में धान उत्पादन के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। इस क्षेत्र की प्रसिद्ध छत्री धान को हाल ही में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने से इसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा कि अब धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर की राशि सरकार उपलब्ध कराएगी, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।

3,941 किसानों के खातों में भेजी गई बोनस राशि

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2026 को रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के 3,941 किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 84 लाख रुपये की बोनस राशि ट्रांसफर की गई। इस योजना के तहत कोदो-कुटकी की फसल पर किसानों को 1,000 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो-कुटकी की खरीद कर रही है। श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ बोनस का भी लाभ दिया जा रहा है।

संबल योजना के तहत 365 करोड़ रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के तहत प्रदेश के 16,754 से अधिक श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि भी जारी की गई। इसके अलावा सिवनी जिले में 629 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया। इन परियोजनाओं पर लगभग 494.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

किसानों को फसल विविधीकरण की सलाह

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपील की कि वे केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें। धान और गेहूं के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को भी अपनाएं, ताकि पूरे वर्ष आय के अतिरिक्त स्रोत बने रहें।

उन्होंने कहा कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

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