नई दिल्ली: “जब नीति, नीयत और निवेश एक दिशा में चलते हैं, तब विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जनता के जीवन में वास्तविक परिवर्तन बनकर दिखाई देता है। उत्तराखंड को मिली यह सहायता उसी परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।”
दिल्ली-देहरादून:भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार उत्तराखंड को विशेष पूंजीगत निवेश सहायता योजना (Special Assistance to States for Capital Investment 2026-27) के अंतर्गत 451.63 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत राज्य को अब तक कुल 2,807.17 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृति जारी हो चुकी है। यह केवल एक वित्तीय स्वीकृति नहीं, बल्कि उत्तराखंड सरकार की विकास योजनाओं, वित्तीय अनुशासन और केंद्र-राज्य समन्वय पर केंद्र सरकार के भरोसे का प्रमाण भी है।
उत्तराखंड की विकास यात्रा को मिला नया बल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड पिछले कुछ वर्षों में आधारभूत संरचना, धार्मिक पर्यटन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। केंद्र द्वारा इतनी बड़ी राशि उपलब्ध कराना इस बात का संकेत है कि राज्य की परियोजनाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप माना जा रहा है। पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इसका प्रभाव वर्षों तक दिखाई देता है। सड़कें, पुल, अस्पताल, पेयजल योजनाएँ, पर्यटन सुविधाएँ और सार्वजनिक अधोसंरचना जैसे निर्माण भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं।
विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 का जो लक्ष्य रखा है, उसमें राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड जैसे सीमांत एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में पूंजीगत निवेश बढ़ना राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा क्षेत्रों के विकास तथा पर्यटन अर्थव्यवस्था-तीनों को एक साथ मजबूत करता है। राज्य सरकार यदि इस राशि का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करती है तो इसका लाभ सीधे स्थानीय रोजगार, निर्माण गतिविधियों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

वित्तीय अनुशासन की भी सराहना
इस स्वीकृति पत्र में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि धनराशि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप ही खर्च की जाएगी, उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत होंगे, परियोजनाओं में दोहरी फंडिंग नहीं होगी तथा समयबद्ध व्यय सुनिश्चित करना होगा। यह दर्शाता है कि केंद्र केवल धन उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि परिणाम आधारित और जवाबदेह विकास मॉडल को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
उत्तराखंड के लिए अवसर
यदि इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाता है तो आने वाले वर्षों में..
राज्य की आधारभूत संरचना और मजबूत होगी।
पर्यटन एवं धार्मिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
निवेश आकर्षित होगा।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पर्वतीय क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

उत्तराखंड को मिली यह वित्तीय सहायता केवल बजटीय आवंटन नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य की विकास क्षमता पर व्यक्त किया गया विश्वास है। यह अवसर भी है और जिम्मेदारी भी। यदि राज्य सरकार इस धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी और परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित करती है, तो यह सहायता उत्तराखंड को “विकसित उत्तराखंड” की दिशा में महत्वपूर्ण गति दे सकती है।





