
नेपाल से भटककर यूपी पहुंची 147 किलो की गर्भवती डॉल्फिन, 52 किमी का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ा गया
गोरखपुर: नेपाल की त्रिवेणी नदी से भटककर महराजगंज जिले की एक नहर में पहुंची 147 किलोग्राम वजनी गर्भवती डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू किया गया। करीब तीन दिन तक नहर में फंसी रहने के बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित निकाला और 52 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर गोरखपुर लाया। उपचार और स्वास्थ्य जांच के बाद डॉल्फिन को राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
तीन दिन तक नहर में फंसी रही डॉल्फिन
गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश कुमार सिंह ने बताया कि डॉल्फिन नेपाल की त्रिवेणी नदी से बहते हुए महराजगंज जिले के परतावल क्षेत्र स्थित धरमौली बाजार की नहर में पहुंच गई थी। वह करीब तीन दिनों तक वहीं फंसी रही, जिससे उसकी जान को खतरा पैदा हो गया था।
बारिश और तेज बहाव बना रेस्क्यू में चुनौती
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बीसी ब्रम्हा के निर्देशन में 19 जुलाई को भी डॉल्फिन को निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन लगातार बारिश और नहर में तेज जलप्रवाह के कारण अभियान सफल नहीं हो सका।
इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर नहर में पानी का स्तर कम कराया गया। सोमवार, 20 जुलाई को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज के अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्रामसभा के पास देवरिया कैनाल से डॉल्फिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया।
डॉल्फिन एंबुलेंस में हुआ इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण
रेस्क्यू के बाद डॉल्फिन को विशेष डॉल्फिन एंबुलेंस में रखा गया, जहां उसका प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि यह 7 फीट 2 इंच लंबी, 147 किलोग्राम वजनी गर्भवती मादा डॉल्फिन है। विशेषज्ञों ने उसे राप्ती नदी में छोड़ने का फैसला किया, जिसे डॉल्फिन के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास माना जाता है।
52 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पहुंचाई गई राप्ती नदी
गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर डॉल्फिन को सुरक्षित राप्ती नदी तक पहुंचाने के लिए 52 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इस विशेष व्यवस्था की बदौलत डॉल्फिन एंबुलेंस ने भटहट से राजघाट स्थित राप्ती तट तक की दूरी करीब 1 घंटे 5 मिनट में पूरी की।
इसके बाद विशेषज्ञों की निगरानी में डॉल्फिन को सुरक्षित रूप से राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।



