
नई दिल्ली: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चार माह तक चलने वाले चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस अवधि का समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर होगा। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर व्रत, पूजा और दान-पुण्य करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति तथा पापों से मुक्ति का फल मिलने की मान्यता है। इसके साथ ही इस दिन किए गए दान-पुण्य को भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
अन्नदान करना माना गया है महादान
देवशयनी एकादशी के दिन गेहूं, चावल, दाल और अन्य खाद्यान्न का दान करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में अन्नदान को महादान की संज्ञा दी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अन्न दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहती।
जल सेवा से मिलता है विशेष पुण्य
इस दिन राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करना या प्यासे लोगों को शीतल जल पिलाना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। सनातन परंपरा में जलदान को श्रेष्ठ सेवा माना गया है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
फल और वस्त्र का दान भी है शुभ
देवशयनी एकादशी पर मौसमी फलों का दान करने के साथ-साथ पीले या नए वस्त्र जरूरतमंदों को देना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
पीली वस्तुओं और जूते-चप्पल का करें दान
इस दिन पीला चंदन, केसर, पीले फूल तथा अन्य पीले रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा गरीब और जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल दान करने की भी मान्यता है। इसे पुण्यदायी कार्य माना गया है।
गौसेवा और धार्मिक वस्तुओं का दान
देवशयनी एकादशी के अवसर पर गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। इसके साथ ही धार्मिक पुस्तकों, तुलसी के पौधे और मिट्टी के बर्तनों का दान भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन कार्यों से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।



