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पेपर लीक की सबसे कमजोर कड़ी क्या है? पीएम मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताया सबसे बड़ा खतरा

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधार के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति की जिम्मेदारी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त बनाने की रूपरेखा तैयार करना है। टास्क फोर्स की अगुवाई प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं।

सिर्फ तकनीक से नहीं रुकेगा पेपर लीक

टास्क फोर्स के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि का कहना है कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल तकनीकी उपायों से संभव नहीं है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ मजबूत संस्थागत व्यवस्था, जवाबदेही और भरोसेमंद तंत्र विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ा दायरा, बढ़ीं चुनौतियां

डॉ. कामकोटि ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में प्रतियोगी परीक्षाओं का स्वरूप और दायरा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1985 में जब उन्होंने जेईई परीक्षा दी थी, तब इसमें करीब 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि आज यह संख्या 15 लाख से अधिक हो चुकी है। ऐसे में बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करने में तकनीक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

टास्क फोर्स में कई क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल

सरकार द्वारा गठित इस समिति में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। नंदन नीलेकणि के अलावा पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा भी इस टास्क फोर्स का हिस्सा हैं। समिति तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन और परीक्षा संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर सुधारों का खाका तैयार करेगी।

‘मेकर-चेकर’ मॉडल पर हो रहा मंथन

डॉ. कामकोटि के अनुसार समिति दो प्रमुख बिंदुओं पर काम कर रही है। पहला, परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग और दूसरा, जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित करना। इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र की तर्ज पर ‘मेकर-चेकर’ मॉडल अपनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें किसी एक व्यक्ति के कार्य का स्वतंत्र रूप से दूसरे व्यक्ति द्वारा सत्यापन किया जाएगा। इससे पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों को मजबूत करने का लक्ष्य है।

प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती

डॉ. कामकोटि ने कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे संवेदनशील कड़ी प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया होती है। उनके मुताबिक, यदि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े व्यक्ति पर भरोसा नहीं किया जा सके और वहीं से जानकारी लीक हो जाए, तो दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक भी ऐसी घटना को पूरी तरह नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना, उससे जुड़े लोगों की जवाबदेही तय करना और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करना टास्क फोर्स की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

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