
नई दिल्ली: सावन माह के दौरान ग्रह-नक्षत्रों की चाल में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 2 अगस्त 2026 को राहु अपने वर्तमान शतभिषा नक्षत्र से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ और लाभकारी माना जा रहा है।
धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, जिन्हें साहस, ऊर्जा, भूमि और पराक्रम का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में राहु का इस नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए आर्थिक प्रगति, करियर में उन्नति और नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।
मेष राशि
मेष राशि के स्वामी मंगल होने के कारण राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश सकारात्मक परिणाम दे सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना रहेगी और आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत हो सकती है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने के योग बनेंगे। नया कारोबार शुरू करने या निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी समय अनुकूल माना गया है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों को इस दौरान भाग्य का अच्छा साथ मिलने की संभावना है। विदेश यात्रा, विदेशी कारोबार या दूरस्थ क्षेत्रों से जुड़े कार्यों में लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति और वेतन वृद्धि के संकेत हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभाव में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए संपत्ति और निवेश से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग हैं। जमीन, मकान या वाहन खरीदने की योजना पूरी हो सकती है। पुराने निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। प्रतियोगी क्षेत्रों में प्रयास कर रहे लोगों को भी सफलता मिल सकती है।
कुंभ राशि
धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध कुंभ राशि से भी माना जाता है। इस अवधि में आत्मविश्वास बढ़ सकता है और करियर में नई उपलब्धियां हासिल होने के संकेत हैं। तकनीक, शोध और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
राहु के शुभ प्रभाव के लिए पारंपरिक उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु के सकारात्मक प्रभाव के लिए कुछ पारंपरिक उपाय भी बताए गए हैं।
- शनिवार के दिन पक्षियों को बाजरा या सप्तधान्य खिलाएं।
- प्रतिदिन “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र की एक माला का जाप करें।
- भगवान शिव का जलाभिषेक करें और शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें।



