सावन के पहले सोमवार ओंकारेश्वर में दिखेगा अद्भुत नजारा, शाही सवारी और नर्मदा नौका विहार के होंगे दिव्य दर्शन

ओंकारेश्वर: सावन माह के पहले सोमवार पर मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर पूरी तरह शिवमय रहेगी। भगवान श्री ओंकारेश्वर और श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की पारंपरिक शाही सवारी पूरे धार्मिक वैभव और भक्ति भाव के साथ निकाली जाएगी। करीब पांच घंटे तक दोनों ज्योतिर्लिंग नगर भ्रमण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस दौरान नर्मदा तट पर विशेष पूजन, पंचमुखी रजत प्रतिमा का नर्मदा स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक, महाआरती और दोनों ज्योतिर्लिंगों का संयुक्त नौका विहार प्रमुख आकर्षण रहेगा।
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और पुष्पों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। गर्भगृह सहित पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया जाएगा। पूरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।
शाम चार बजे निकलेगी भगवान ओंकारेश्वर की शाही पालकी
शाम 4 बजे विधिवत पूजन-अर्चन और महाआरती के बाद भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पंचमुखी रजत प्रतिमा को पालकी में विराजित किया जाएगा। इसके बाद पालकी मंदिर से रवाना होकर आदि शंकराचार्य गुफा मार्ग, श्रीजी मंदिर होते हुए कोटितीर्थ घाट पहुंचेगी। पूरे मार्ग में श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे, जबकि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से स्वागत मंच भी लगाए जाएंगे।
नर्मदा तट पर होगा विशेष अभिषेक और महाआरती
कोटितीर्थ घाट पर भगवान की पंचमुखी रजत प्रतिमा का नर्मदा के पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष अभिषेक, पूजन और महाआरती संपन्न होगी। धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन आचार्य राजेश्वर दीक्षित के मार्गदर्शन में किया जाएगा।
उधर, भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की पालकी शाम 4:30 बजे मंदिर से रवाना होकर श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा घाट पहुंचेगी। यहां पुजारी जगदीश उपाध्याय, पंडित श्रीकांत जोशी और अन्य विद्वानों की उपस्थिति में पूजा-अर्चना की जाएगी।
संयुक्त नौका विहार बनेगा सबसे बड़ा आकर्षण
शाम करीब 6 बजे भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की पालकियां नर्मदा में संयुक्त नौका विहार करेंगी। इसके बाद दोनों पालकियां महानिर्वाणी घाट से नगर भ्रमण के लिए रवाना होंगी। शाही सवारी विष्णु मंदिर, मुख्य बाजार और जेपी चौक सहित प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगी, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
भगवान ओंकारेश्वर की पालकी पुराने झूला पुल से नर्मदा पार कर शिवपुरी क्षेत्र होते हुए रात करीब 9:30 बजे मंदिर पहुंचेगी, जहां शयन आरती के बाद भगवान को शयन कराया जाएगा। वहीं भगवान ममलेश्वर की पालकी गोमुख घाट और जूना अखाड़ा मार्ग से होते हुए मंदिर लौटेगी, जहां महाआरती के बाद शयन की परंपरा निभाई जाएगी।
नौका विहार के दौरान नर्मदा के मध्य नाविक भगवान की पालकियों की परिक्रमा कराएंगे। दोनों झूला पुलों और नर्मदा तट पर मौजूद श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान और मां नर्मदा का स्वागत करेंगे। शंख, घंटा और नगाड़ों की गूंज के बीच पूरा घाट क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर रहेगा।
लाखों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के पहुंचने का अनुमान
सावन के पहले सोमवार पर हजारों कांवड़िये नर्मदा स्नान के बाद कांवड़ में जल भरकर उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के लिए रवाना होंगे। वहीं उज्जैन से शिप्रा जल लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करने पहुंचेंगे।
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने की संभावना है। रविवार रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। सावन के प्रत्येक रविवार, सोमवार और अमावस्या पर भी भारी भीड़ रहने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, मंदिर ट्रस्ट, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर में वन-वे दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात रहेगा।
सावन में भारी वाहनों पर रहेगा प्रतिबंध
सावन माह के दौरान खंडवा जिला प्रशासन ने इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ओंकारेश्वर क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। केवल एंबुलेंस, पुलिस वाहन, दूध, ईंधन टैंकर और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। इंदौर और खंडवा के बीच संचालित भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजा जाएगा, जिससे उन्हें लगभग 100 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी। सावन के सोमवारों पर सामान्य नौका संचालन भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल सुरक्षा एजेंसियों और मंदिर ट्रस्ट की अधिकृत नौकाओं को भगवान की शाही सवारी के नौका विहार के लिए अनुमति दी जाएगी।



