हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा! एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, इस गंभीर बीमारी के लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को कई गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह माना जाता है। यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का जोखिम बढ़ा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण हाइपरटेंशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी के साथ एक और गंभीर समस्या पल्मोनरी हाइपरटेंशन को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या है पल्मोनरी हाइपरटेंशन?
पल्मोनरी हाइपरटेंशन उच्च रक्तचाप का ही एक प्रकार है, जो फेफड़ों और हृदय के दाहिने हिस्से की धमनियों को प्रभावित करता है। इसके एक रूप, पल्मोनरी आर्टरियल हाइपरटेंशन में फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं संकरी, अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे फेफड़ों के माध्यम से रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिसका असर हृदय और शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रहा है इस बीमारी का खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पल्मोनरी हाइपरटेंशन कुछ मामलों में गंभीर और जानलेवा भी साबित हो सकती है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण इस बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना और स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी माना जाता है।
इन कारणों से हो सकती है बीमारी
पल्मोनरी हाइपरटेंशन कई कारणों से विकसित हो सकती है। इसके पीछे खराब जीवनशैली के अलावा जन्मजात हृदय रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर से जुड़ी बीमारियां जैसे सिरोसिस और फेफड़ों में रक्त के थक्के बनने जैसी स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
रक्त प्रवाह प्रभावित होने से बढ़ती है समस्या
सामान्य स्थिति में रक्त फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं के माध्यम से आसानी से हृदय के बाईं ओर पहुंचता है। लेकिन जब फेफड़ों की धमनियों की भीतरी कोशिकाओं में बदलाव होने लगता है, तो उनकी दीवारें संकरी, कठोर या सूजी हुई हो सकती हैं। इससे रक्त का प्रवाह धीमा पड़ जाता है और पल्मोनरी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है।
इलाज और बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पल्मोनरी हाइपरटेंशन का स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है। हालांकि दवाइयों और कुछ विशेष प्रकार की थेरेपी की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। समय पर उपचार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्वस्थ जीवनशैली से कम हो सकता है जोखिम
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि साबुत अनाज, ताजे फल, हरी सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद और लीन मीट को आहार में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को नियंत्रित रखना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना हाइपरटेंशन से जुड़े जोखिमों को कम करने में मददगार माना जाता है।



