बिहार

बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा नया स्वरूप! केसरिया स्तूप, बोधगया और मंदार का होगा वैज्ञानिक सर्वे, CM सम्राट चौधरी के बड़े निर्देश

पटना: बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और केसरिया स्तूप समेत कई प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। उन्होंने कहा कि इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व को नए सिरे से स्थापित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनाया जाए।

देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद, प्रोफेसर रजत सान्याल, प्रोफेसर अनिल कुमार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरिओम शर्मा तथा विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।

केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का होगा वैज्ञानिक उत्खनन

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष भाग का वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन कराने का निर्देश दिया। अब तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है, जबकि इसके बड़े हिस्से में महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि परिसर के आसपास भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए।

आधुनिक तकनीक से होगा सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ने महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास लाइट डिटेक्शन एंड रैंगिंग तथा ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक की मदद से वैज्ञानिक सर्वे कराने को कहा। सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के साथ उनके वास्तविक स्वरूप और पुरातात्विक महत्व को सामने लाना है।

मंदार, सुल्तानगंज और कैमूर क्षेत्र के विकास पर भी जोर

बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ और अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व वाले स्थलों के एकीकृत विकास की योजना पर भी चर्चा हुई। भविष्य में इन स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व वाले स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर भी विशेष जोर दिया गया।

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और विकसित किया जाए, ताकि उनकी ऐतिहासिक पहचान और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन स्थलों को इस तरह विकसित किया जाए जिससे बिहार में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ्तार मिले और देश-विदेश से अधिक संख्या में पर्यटक आकर्षित हों।

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