
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करवाना हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है। अदालत ने कहा कि इस तरह का कृत्य लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और करियर को बर्बाद कर देता है तथा पूरे समाज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी।
पूर्व आईएएस अधिकारी को नहीं मिली राहत
62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव को केंद्रीय जांच एजेंसी ने सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। वर्ष 2020 से 2022 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के दौरान वह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर कार्यरत थे। उनके बेटे सुमित ध्रुव भी इस मामले में आरोपी हैं, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था। जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 31 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।
‘लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है’
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने या उसमें सहयोग करने वाला व्यक्ति लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। अभ्यर्थी वर्षों तक कठिन मेहनत कर इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे अपराध का प्रभाव केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज के विश्वास और व्यवस्था को प्रभावित करता है। इसी आधार पर अदालत ने इसे हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध बताया।
सचिव पद का दुरुपयोग करने का आरोप
अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपी की भूमिका को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। आदेश के अनुसार आरोपी ने आयोग के सचिव पद पर रहते हुए अपने आधिकारिक दायित्वों का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उसने वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया, जिसके बाद उसका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। अदालत ने यह भी कहा कि घर से हुई बरामदगी, गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
बचाव पक्ष ने खुद को बताया निर्दोष
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जीवन किशोर ध्रुव को केवल सचिव पद पर रहने के कारण इस मामले में फंसाया गया है। वकील ने कहा कि प्रारंभिक प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और जांच के दौरान बाद में उन्हें आरोपी बनाया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक मोबाइल फोन के अलावा आरोपी के पास से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या गोपनीय प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ है और प्रश्नपत्र लीक करने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण भी उपलब्ध नहीं है।
सीबीआई ने जमानत का किया विरोध
जमानत याचिका का विरोध करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि आरोपी की भूमिका, अपराध की गंभीरता और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती। एजेंसी के अनुसार यह मामला राज्य सिविल सेवा परीक्षा 2021 में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं तथा हजारों अभ्यर्थियों के विश्वास को प्रभावित किया है।
भर्ती घोटाले में पहले भी दर्ज हो चुके हैं दो मामले
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2020 से 2022 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले दो मामले दर्ज किए गए थे। बाद में जुलाई 2024 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूरे भर्ती घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली। इस मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी, पूर्व उप नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।



