
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा का घेराव करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पुलिस के बल प्रयोग को संयमित बताते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया और पुलिसकर्मियों तथा अधिकारियों को निशाना बनाया गया।
छात्र झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द करने, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर 24 जुलाई से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। शुरुआती अनुमति नहीं मिलने और आंदोलन की स्थिति को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को 28 जुलाई को जयपाल सिंह स्टेडियम भेजा गया था। हालांकि, सरकारी समिति के साथ बातचीत के बीच छात्र संगठनों ने सोमवार को विधानसभा की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार टकराव हुआ और कम से कम तीन बार लाठीचार्ज किया गया।
प्रशासन का दावा, 14 पुलिसकर्मी घायल
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना के बीच रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने सोमवार देर रात संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान काफी संयम बरता और जवानों की जान को खतरा पैदा होने तथा पथराव की स्थिति में ही न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया।
एसएसपी के मुताबिक, झड़प के दौरान कुल 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें एक जवान को गंभीर चोट लगी है, जबकि अन्य घायल पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार दिया गया।
डीसी बोले- जवान पर पत्थर फेंका, कुचलने की कोशिश हुई
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को उकसाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, एक पुलिसकर्मी पर पत्थर फेंका गया। इसके अलावा एक अन्य जवान को भीड़ ने कुचलने की कोशिश की, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई।
डीसी ने कहा कि जवान को बचाने और रास्ते को सामान्य कराने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
अधिकारियों की गाड़ियों पर जूते-चप्पल फेंकने का आरोप
एसएसपी राकेश रंजन ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की और उन पर जूते-चप्पल समेत अन्य सामान फेंका। प्रशासन अब उन लोगों की पहचान करने में जुटा है, जिन्हें हिंसा और शांति भंग करने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा है कि पहचान होने के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घायल छात्रों ने पुलिस के दावे को बताया गलत
दूसरी ओर, घायल छात्रों ने प्रशासन के आरोपों को खारिज किया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे और पुलिस ने बिना पूर्व चेतावनी के लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
घायल छात्र शिवम ने आरोप लगाया कि सौ से अधिक युवाओं को लाठियों से पीटा गया। छात्रों के मुताबिक, वे पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे और सरकार की ओर से जवाब का इंतजार कर रहे थे। उनका आरोप है कि बातचीत के बजाय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की।
बंद को लेकर प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
छात्रों के समर्थन में झारखंड भाजपा ने मंगलवार को बंद का आह्वान किया है। इसे लेकर रांची प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उपायुक्त ने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने या हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दूर-दराज से रांची पहुंचे छात्रों को वापस उनके घरों तक भेजने में मदद के लिए प्रशासन हेल्पलाइन नंबर जारी करने की तैयारी में है। इसके जरिए जरूरतमंद छात्रों को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
JPSC मामले में ED की जांच भी शुरू
JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ईसीआईआर दर्ज की है। ऐसे में छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच यह पूरा मामला और अधिक गंभीर हो गया है।



