
रांची: खनिजों और खनिज युक्त भूमि पर राज्यों की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त कर, उपकर यानी सेस और अन्य शुल्क को लेकर लोकसभा में बुधवार को बड़ा फैसला हुआ। सदन ने ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026’ को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर अपनी ओर से नया कर, सेस या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी। इसका सीधा असर खनिज संपदा वाले झारखंड पर पड़ सकता है।
विपक्ष ने संघीय ढांचे के खिलाफ बताया
विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन समेत कुछ विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। उन्होंने इसे संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया।
इससे पहले एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति भेजने का प्रस्ताव पारित होने के बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दोपहर 2:27 बजे सदन की कार्यवाही 3 बजे तक स्थगित कर दी थी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर खनिज संशोधन विधेयक पेश किया गया। विपक्ष के विरोध के बावजूद सदन ने इसे बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके बाद हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
खनिज भूमि के विनियमन में भी केंद्र की भूमिका
विधेयक में राज्यों की ओर से अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति खत्म करने के साथ खनिज संपदा से जुड़ी भूमि के विनियमन को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। विधेयक लागू होने के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज संपदा से जुड़ी भूमि के विनियमन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होगा।
इसके तहत खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कर और शुल्क को लेकर राज्यों की स्वतंत्र भूमिका सीमित हो जाएगी। ऐसे शुल्क केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों, सीमाओं और रॉयल्टी के आधार पर ही तय किए जा सकेंगे।
झारखंड को खनिज से कितना राजस्व मिलता है?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड के खनन विभाग को कुल 18,730.91 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसमें अकेले सेस से 7,487.91 करोड़ रुपये की राशि मिली थी।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनन विभाग की कुल वसूली 11,848.15 करोड़ रुपये रही थी। इसमें सेस की राशि करीब 1,380 करोड़ रुपये थी। नए प्रावधानों के लागू होने पर खनिज से मिलने वाले इस राजस्व स्रोत को लेकर राज्य सरकार के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।
किन प्रावधानों का होगा सबसे ज्यादा असर?
नए विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक, राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर अपनी ओर से कोई नया कर, सेस या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी। खनिज भूमि से जुड़े कर या शुल्क केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों और सीमाओं के आधार पर ही तय किए जा सकेंगे।
इसके अलावा, कानून लागू होने से पहले का ऐसा कोई कर या शुल्क, जिसे राज्य सरकारों ने वसूल नहीं किया है, उसे अवैध माना जाएगा।
मंईयां सम्मान योजना पर भी पड़ सकता है असर
झारखंड सरकार की मंईयां सम्मान योजना राज्य की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत संचालित इस योजना से 51 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 14,065.57 करोड़ रुपये और 2026-27 में 13,363.35 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया था। झारखंड मिनिरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट 2024 के तहत खनिजों पर लगाए गए सेस से प्राप्त राशि का इस्तेमाल राज्य सरकार मंईयां सम्मान योजना में करती है।
योजना के तहत करीब 51 लाख महिला लाभुकों को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाते हैं। ऐसे में खनिज सेस से जुड़े नए प्रावधानों के कानून बनने पर राज्य सरकार को इस योजना समेत सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अन्य योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर अतिरिक्त आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
राज्यसभा और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
लोकसभा से विधेयक पारित हो चुका है। इसे कानून का रूप लेने के लिए राज्यसभा से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना जरूरी है। इन प्रक्रियाओं के बाद प्रावधान लागू होने पर झारखंड समेत खनिज संपदा वाले राज्यों की राजस्व व्यवस्था और खनिज भूमि से जुड़े अधिकारों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।



