हल्द्वानी: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर तीन प्रमुख पैमाने तय किए हैं। इनमें लोकप्रियता और जनाधार, कार्यकर्ताओं की नाराजगी तथा स्थानीय परिस्थितियों के साथ मजबूत दावेदारों की स्थिति शामिल है। टिकट तय करने की प्रक्रिया में मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों से मिलने वाले फीडबैक को भी अहम माना जा रहा है।
विधायकों की तीन कसौटियों पर होगी परख
भाजपा संगठन की ओर से विधायकों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर क्षेत्रवार फीडबैक जुटाने की तैयारी है। इसमें देखा जाएगा कि संबंधित विधायक की जनता के बीच कितनी पकड़ है, कार्यकर्ताओं के बीच उनके प्रति कितना समर्थन या असंतोष है और क्षेत्र में उनके मुकाबले कौन से मजबूत दावेदार मौजूद हैं।
पार्टी की योजना कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अध्यक्षों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय करने की है। गढ़वाल मंडल की बैठक 9 अगस्त को हो चुकी है, जबकि रविवार को कुमाऊं के मंडल अध्यक्षों की बैठक चोरगलिया में हुई।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने के निर्देश
बैठक में मंडल अध्यक्षों को बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरकार की योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने, एसआईआर को लेकर लोगों को जागरूक करने और नए मतदाताओं को जोड़ने पर जोर दिया गया।
पार्टी ने युवाओं को संगठन से जोड़ने और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बूथ समितियों को सक्रिय करने को भी प्राथमिकता दी है।
लोकप्रियता और जनाधार की रिपोर्ट होगी अहम
पार्टी सूत्रों के मुताबिक पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जनता का रुझान समझने के निर्देश दिए गए हैं। विधायक पद के संभावित दावेदारों की लोकप्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और गैर-भाजपा विधायकों वाले क्षेत्रों में मजबूत दावेदारों की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल भाजपा के 47 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं। हालांकि पार्टी के एक सर्वे में कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की बात भी कही जा रही है।
युवा और मजबूत चेहरों पर भी जोर
संगठनात्मक बैठक के दौरान धारचूला, लोहाघाट, अल्मोड़ा, सल्ट और जागेश्वर विधानसभा क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी चर्चा हुई। नेताओं ने धारचूला और अल्मोड़ा सीटों पर इस बार योग्य युवा चेहरों को मौका देने की वकालत की। वहीं अन्य सीटों पर भी मजबूत जनाधार वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की मांग रखी गई।
मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों की राय को मिलेगी अहमियत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मुताबिक विधानसभा चुनाव में संभावित दावेदारों को लेकर मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों की राय महत्वपूर्ण रहेगी। कुमाऊं और गढ़वाल की बैठकों में क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए जिलाध्यक्षों को जिम्मेदारी देने पर भी जोर दिया गया, ताकि सरकार के विकास कार्यों की जानकारी अंतिम गांव तक पहुंचाई जा सके।
भाजपा की नजर सत्ता की हैट्रिक पर
भाजपा ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। रविवार को चोरगलिया में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संगठन की निचली इकाई से लेकर सांसदों और विधायकों तक की तैयारियों का फीडबैक लिया।
यूएस नगर में बढ़त बनाने और नैनीताल की सीटें बचाने की चुनौती
बैठक में ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस की बढ़त को तोड़ने और नैनीताल में अपनी मौजूदा स्थिति बरकरार रखने पर भी चर्चा हुई। 2022 के विधानसभा चुनाव में कुमाऊं की 29 सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं।
ऊधमसिंह नगर की नौ सीटों में कांग्रेस ने पांच और भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं नैनीताल जिले की छह सीटों में भाजपा ने पांच पर जीत हासिल की थी। बैठक में कुमाऊं के 117 मंडल अध्यक्षों और आठ जिलाध्यक्षों से बूथों की सक्रियता, संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, सरकार की योजनाओं के असर और विधायकों की जनता के बीच पकड़ को लेकर जानकारी ली गई।
अल्मोड़ा और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्रों के सांसदों तथा विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें भी हुईं। विधायकों से स्थानीय परिस्थितियों और चुनावी तैयारियों को लेकर फीडबैक लिया गया। मानसून के दौरान खराब सड़कों और विकास से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक फीडबैक में शामिल किया गया।
तराई की सीटों पर स्थानीय समीकरण साधने की तैयारी
भाजपा का लक्ष्य तराई क्षेत्र में सीटों का गणित अपने पक्ष में करने का है। खटीमा, किच्छा, नानकमत्ता, बाजपुर और जसपुर जैसी सीटों पर संगठन की सक्रियता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर मंथन किया गया।
वहीं नैनीताल जिले में पार्टी के सामने मौजूदा पांच सीटों को बचाए रखने की चुनौती है। संगठन इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने और चुनाव से पहले संभावित कमजोरियों को दूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विधायकों और मंत्रियों को भी सक्रिय होने का संदेश
रामलीला मैदान के शुद्धीकरण विवाद के बाद कांग्रेस लगातार भाजपा पर हमलावर है। भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से बड़ा बनने से रोकने के लिए सरकार के कामकाज और संगठन की सक्रियता के जरिए जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।
इसके लिए विधायकों और मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया है। रविवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुआ बैठकों का सिलसिला शाम तक चला। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा के लिए रवाना हुए।




