पर्यटन

शिमला-मनाली से कहीं आगे है हिमाचल की पहचान, जायका, संस्कृति और परंपराएं बनाती हैं इसे खास

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश को आमतौर पर बर्फ से ढकी पहाड़ियों, देवदार के जंगलों और खूबसूरत घाटियों के लिए जाना जाता है। लेकिन हिमालय की गोद में बसा यह राज्य केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। यहां की समृद्ध पहाड़ी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, लोकनृत्य, त्योहार और हस्तशिल्प भी हिमाचल को देश के दूसरे राज्यों से अलग पहचान देते हैं।

शिमला-मनाली के अलावा भी कई खास जगहें

शिमला और मनाली हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। शिमला अपनी बर्फबारी, मॉल रोड और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है, जबकि मनाली भी पहाड़ी नजारों और पर्यटन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।

धर्मशाला और मैकलोडगंज तिब्बती संस्कृति तथा आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं, प्रकृति और ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए कसोल और तीर्थन घाटी खास आकर्षण रखते हैं। लाहौल-स्पीति और किन्नौर भी रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों और बाइक सवारों के बीच लोकप्रिय हैं।

हिमाचली धाम से सिड्डू तक, स्वाद भी है खास

हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक खान-पान भी इसकी पहचान का अहम हिस्सा है। हिमाचली धाम यहां की प्रसिद्ध पारंपरिक थाली है, जिसे तांबे के बर्तनों में तैयार किया जाता है। इसमें राजमा, कढ़ी, मदरा और मीठा भात जैसे व्यंजन शामिल होते हैं।

हिमाचल का सिड्डू भी अपने खास स्वाद के लिए जाना जाता है। गेहूं के आटे को खमीर उठाकर भाप में पकाया जाता है और इसे देसी घी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा बबरू और पटोड़े भी हिमाचली खान-पान के लोकप्रिय स्थानीय व्यंजनों में शामिल हैं।

लोकगीत और नाटी में दिखती है हिमाचल की संस्कृति

हिमाचल प्रदेश की संस्कृति यहां के लोकगीतों, लोकनृत्यों और पारंपरिक त्योहारों में साफ दिखाई देती है। राज्य के कई गांवों में स्थानीय कुल देवताओं की विशेष मान्यता है। कुल्लू दशहरा भी इन्हीं स्थानीय देवी-देवताओं की परंपरा से जुड़ा प्रमुख पर्व है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं।

पारंपरिक पहनावे में पुरुषों के लिए कुल्लवी और बुशैहरी टोपी विशेष पहचान रखती हैं। वहीं, महिलाएं धाटू पहनती हैं, जो पारंपरिक स्कार्फ का एक रूप है। हिमाचल का नाटी लोकनृत्य भी काफी प्रसिद्ध है और इसे आमतौर पर समूह में किया जाता है।

कांगड़ा चित्रकला और चंबा शॉल की अलग पहचान

हिमाचल प्रदेश की कला और हस्तशिल्प भी इसकी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं। कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग अपनी बारीक कारीगरी और प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल के लिए देश-दुनिया में पहचान रखती है।

कुल्लवी और चंबा शॉल हाथ से बुने जाते हैं और अपने आकर्षक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं, चंबा रुमाल अपनी बारीक सुई-धागे की कढ़ाई और दोनों तरफ एक जैसी आकृतियों के लिए जाना जाता है।

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