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पानी की कमी से जूझ रहा ब्रिटेन, अब चावल धोने से लेकर वजू तक में पानी बचाने की अपील; अभियान के खर्च पर उठे सवाल

लंदन: इंग्लैंड में पानी की कमी के बीच सरकार और जल कंपनियां लोगों से रोजमर्रा की आदतों में बदलाव कर पानी बचाने की अपील कर रही हैं। इसी अभियान के तहत दक्षिण एशियाई परिवारों से चावल को पांच से सात बार धोने के बजाय केवल दो बार पानी से साफ करने की सलाह दी गई है। दावा है कि इस तरीके से हर बार चावल पकाते समय करीब पांच लीटर पानी बचाया जा सकता है। वहीं मुस्लिम समुदाय से नमाज से पहले वजू करते समय पानी की खपत कम करने की अपील की गई है। इस अभियान पर करीब 2.7 लाख पाउंड खर्च किए जा रहे हैं, जिसे लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं।

चावल धोने की आदत को बदलने पर जोर

इंग्लैंड के कई हिस्से इस समय सूखे की स्थिति से प्रभावित हैं। कई क्षेत्रों में नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर घट रहा है। ऐसे में जल कंपनियां घरों में पानी की खपत कम करने के लिए लोगों को आसान उपाय बता रही हैं। अभियान के दौरान दक्षिण एशियाई परिवारों की चावल धोने की आदत पर भी ध्यान दिया गया है।

अभियान में कहा गया है कि कुछ परिवार कच्चे चावल को साफ करने के लिए पांच से सात बार बहते पानी में धोते हैं। पानी पूरी तरह साफ होने तक चावल धोने के बजाय इसे केवल दो बार धोने की सलाह दी गई है। इसके मुताबिक, ऐसा करने से एक बार चावल पकाने पर करीब पांच लीटर पानी की बचत हो सकती है। चावल धोने के बाद बचा हुआ पानी फेंकने के बजाय पौधों में इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया गया है।

मुस्लिम समुदाय से वजू में पानी बचाने की अपील

पानी बचाने के इस अभियान में मुस्लिम समुदाय को भी शामिल किया गया है। कैंब्रिज सेंट्रल मस्जिद के सहयोग से लोगों को वजू के दौरान पानी की खपत कम करने के तरीके बताए जा रहे हैं। अभियान में लोगों से वजू करते समय नल लगातार खुला रखने के बजाय करीब एक लीटर के जग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

अभियान के अनुसार, लगातार नल चलाकर वजू करने में एक बार में करीब छह से 12 लीटर तक पानी खर्च हो सकता है। ऐसे में पानी की खपत कम करने के लिए सीमित मात्रा में पानी का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।

2.7 लाख पाउंड के खर्च पर उठे सवाल

इस अभियान को लेकर ब्रिटेन में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब आम परिवारों पर पानी के बढ़ते बिल का बोझ है, तब पानी बचाने के ऐसे अभियान पर 2.7 लाख पाउंड खर्च करना कितना उचित है, इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

कंजर्वेटिव नेता माइक वुड ने भी अभियान के खर्च की आलोचना की है। उनका कहना है कि पानी के बढ़ते बिल का भुगतान कर रहे परिवार इस तरह की योजना को देखकर खुश नहीं होंगे। वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि पानी बचाने के लिए जागरूकता अभियानों पर खर्च करने से पहले ब्रिटेन की पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत और उनमें होने वाले पानी के रिसाव को रोकने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

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