किसानों के लिए बड़ी पहल, फार्मर आईडी से बनेगी डिजिटल पहचान; जमीन से लेकर फसल और सरकारी लाभ तक की जानकारी होगी दर्ज

भोपाल: मध्यप्रदेश में किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने के लिए फार्मर आईडी बनाने का अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकारी दल गांव-गांव और किसानों के पास पहुंचकर फार्मर आईडी तैयार कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों से जुड़ी जानकारियों और कृषि सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय बनाना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 20 अगस्त से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में जारी डिजिटल बदलाव ने डिजिटल पहचान, सुरक्षित भुगतान और लेनदेन के जरिए शासन तथा सेवाओं के वितरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में डिजिटल व्यवस्था का विस्तार हुआ है। अब कृषि क्षेत्र में भी इसी तरह का व्यापक बदलाव लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
किसानों की एक डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी फार्मर आईडी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर डिजिटल कृषि मिशन को व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। इसके तहत डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना तैयार करने, डिजिटल फसल अनुमान सर्वेक्षण लागू करने और केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की डिजिटल पहलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में किसान-केंद्रित डिजिटल व्यवस्था का विस्तार गांव और किसान स्तर तक लगातार किया जा रहा है। इसी व्यवस्था के तहत किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और सेवाएं समय पर, व्यक्तिगत स्तर पर और विश्वसनीय तरीके से उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड की तर्ज पर किसान आईडी की शुरुआत की गई है। यह आईडी किसानों की भरोसेमंद डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी।
भूमि से लेकर फसल और सरकारी लाभ तक का रहेगा रिकॉर्ड
फार्मर आईडी को किसानों से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों से जोड़ा जाएगा। इसमें भूमि अभिलेख, पशुधन का स्वामित्व, बोई गई फसल और किसानों को मिले विभिन्न सरकारी लाभ जैसी जानकारी शामिल होगी। इससे किसान से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एक ही डिजिटल पहचान से जुड़े रहेंगे और कृषि से जुड़ी सेवाओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से किसानों तक योजनाओं और कृषि सेवाओं की पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं और सेवाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने में भी मदद मिल सकती है।
डेटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से किसानों को मिलेगा फायदा
डिजिटल कृषि व्यवस्था के विस्तार के साथ किसानों को डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाकर किसानों से संबंधित जानकारी और सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
छह राज्यों में हो चुका है पायलट परियोजना का परीक्षण
किसान आईडी तैयार करने और डिजिटल फसल सर्वेक्षण के परीक्षण के लिए पहले छह राज्यों में पायलट परियोजनाएं संचालित की जा चुकी हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु शामिल रहे। इन परीक्षणों के बाद किसान-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।



