BHU का बड़ा बदलाव: विदेश जाकर शोध करने वाले छात्रों को देनी होगी विश्वविद्यालय में हिस्सेदारी, नए नियमों में बॉन्ड अनिवार्य

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने विदेश जाकर शोध और अकादमिक अनुभव हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए इंटरनेशनल विजिटिंग स्टुडेंट प्रोग्राम के नियमों में अहम बदलाव किया है। अब विश्वविद्यालय के खर्च पर विदेश जाने वाले शोधार्थियों को अंडरटेकिंग और इंडेम्निटी बॉन्ड देना अनिवार्य होगा। विदेश में योजना के तहत किए गए शोध से विकसित बौद्धिक संपदा में बीएचयू और शोधार्थी की संयुक्त हिस्सेदारी भी होगी।
स्टांप पेपर पर देना होगा अंडरटेकिंग और बॉन्ड
इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस परियोजना के तहत 2023 में शुरू किए गए इंटरनेशनल विजिटिंग स्टुडेंट प्रोग्राम के नियमों में बदलाव की अधिसूचना 27 अगस्त को जारी की गई। इसके अनुसार विदेश जाने वाले शोधार्थी को स्टांप पेपर पर बॉन्ड देना होगा। इस पर शोधार्थी के साथ उसके सुपरवाइजर और विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर भी होंगे। संबंधित विभाग, केंद्र और स्कूल के प्रमुखों को यह बॉन्ड जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
नए नियमों के तहत शोधार्थी को भारत के साथ-साथ जिस देश में वह शोध के लिए जा रहा है, वहां के कानून, वीजा और आव्रजन नियमों तथा मेजबान संस्थान के नियमों का पालन करना होगा। दुर्व्यवहार, अनुशासनहीनता, आपराधिक गतिविधि, वित्तीय अनियमितता या वीजा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी शोधार्थी की होगी।
विदेश में बने पेटेंट और तकनीक में बीएचयू की हिस्सेदारी
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विदेश में शोध से तैयार होने वाली बौद्धिक संपदा से जुड़ा है। योजना के तहत किए गए शोध से यदि पेटेंट, सॉफ्टवेयर, डेटा, तकनीक, आविष्कार या अन्य शोध उत्पाद विकसित होते हैं तो उनमें बीएचयू और शोधार्थी की संयुक्त हिस्सेदारी होगी।
शोधार्थी को विदेश में विकसित ऐसी बौद्धिक संपदा की जानकारी विश्वविद्यालय को देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा शोधार्थी की गलती से किसी तरह का नुकसान, कानूनी खर्च या अन्य देनदारी उत्पन्न होने पर विश्वविद्यालय उसकी भरपाई भी संबंधित शोधार्थी से कर सकेगा।
बीएचयू देता है लाखों रुपये की फेलोशिप
इंटरनेशनल विजिटिंग स्टुडेंट प्रोग्राम के तहत बीएचयू के 30 से अधिक शोधार्थी दुनिया के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में जाकर शोध कर चुके हैं। कई शोधार्थी अभी भी विदेश में रहकर अपने शोध कार्य में जुटे हुए हैं।
योजना के तहत अधिकतम छह महीने तक विदेश में शोध का अवसर मिलता है। इस दौरान बीएचयू शोधार्थी को हर महीने 1800 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1.71 लाख रुपये की फेलोशिप देता है। इसके अलावा आने-जाने का इकोनॉमी श्रेणी का हवाई टिकट, वीजा शुल्क और स्वास्थ्य बीमा का खर्च भी विश्वविद्यालय वहन करता है।
आईआईटी बीएचयू का दीक्षांत समारोह 31 अक्टूबर को
आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह इस वर्ष 31 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। संस्थान ने सोमवार को इसकी आधिकारिक तारीख घोषित की। पहले शैक्षणिक कैलेंडर में दीक्षांत समारोह की तारीख छह नवंबर निर्धारित थी, जिसे संशोधित करके 31 अक्टूबर कर दिया गया है।
तारीख तय होने के बाद संस्थान स्नातक, स्नातकोत्तर, आईडीडी और पीएचडी विद्यार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुट गया है। मेडल और पुरस्कार पाने वाले विद्यार्थियों की सूची भी तैयार की जा रही है। इस वर्ष आईआईटी बीएचयू से 1700 से अधिक विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे।



