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नदी संरक्षण भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व : योगी

‘बमाया एवं कोटवाली नदी पुनर्जीवन’ पुस्तक प्रकाशित, सीएम योगी ने की सराहना

लखनऊ : जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित पुस्तक ‘बमाया एवं कोटवाली नदी पुनर्जीवन’ का प्रकाशन नाटल्स पब्लिकेशन, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। पुस्तक के लेखक जलपुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह, तरुण भारत संघ, राजस्थान तथा संपादक पर्यावरणविद् प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह, महानिदेशक (तकनीकी), स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस), लखनऊ हैं। पुस्तक में वर्ष 2026 में बमाया एवं कोटवाली नदियों के पुनर्जीवन के अनुभवों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भारतीय वैदिक ज्ञान, जल विज्ञान, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरण संरक्षण, जल-प्रबंधन और जनभागीदारी के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों को समाहित किया गया है।

पुस्तक के प्रकाशन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नदी संरक्षण को भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व बताया। उन्होंने बमाया एवं कोटवाली नदियों के पुनर्जीवन को जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरण संतुलन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरक उदाहरण बताया तथा विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं और जल-पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। एसएमएस के सचिव एवं सीईओ शरद सिंह ने इस पहल को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए डॉ. राजेन्द्र सिंह एवं दोनों अनुसंधान केंद्रों की टीम के प्रयासों की सराहना की।

संपादक प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह ने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य दो नदियों के पुनर्जीवन का दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ-साथ जल संरक्षण को जन-अभियान बनाने और भारतीय जल-दृष्टि को आधुनिक विज्ञान एवं जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश देना है। उन्होंने डॉ. राजेन्द्र सिंह, जलपुरुष, तरुण भारत संघ तथा एसएमएस के वैदिक विज्ञान केंद्र एवं सी.वी. रमन अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। एसएमएस परिवार ने मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुस्तक के प्रयासों की सराहना एवं शुभकामनाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

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