
नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में घर में कछुए को रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कछुए का संबंध भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि घर में कछुआ रखने से शांति बनी रहती है और सुख-समृद्धि आती है। इसे सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, वास्तु के अनुसार कछुआ किस धातु का हो, उसे किस दिशा में रखा जाए और उसका मुंह किस ओर हो, इन बातों का भी विशेष महत्व बताया गया है।
जीवित कछुआ रखें या धातु का?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में कछुआ रखा जा सकता है। हालांकि, जीवित कछुए के बजाय पीतल या तांबे से बने कछुए को रखना अधिक शुभ माना जाता है। इसके अलावा स्फटिक या चांदी का कछुआ भी घर में रखा जा सकता है। इन वस्तुओं को वास्तु में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
किस दिशा में रखना माना जाता है शुभ?
कछुए को घर में रखने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। वास्तु में इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इसके अलावा कछुए को उत्तर दिशा में भी रखा जा सकता है। मान्यता है कि इन दिशाओं में कछुआ रखने से घर में सकारात्मकता और स्थिरता बनी रहती है।
धातु और स्फटिक के कछुए को पानी में रखें
वास्तु नियमों के अनुसार धातु या स्फटिक से बने कछुए को साफ पानी में रखना चाहिए। जिस पात्र में कछुआ रखा गया है, उसके पानी को समय-समय पर बदलते रहना और पात्र को साफ रखना जरूरी माना जाता है। गंदे पानी या गंदे पात्र में कछुआ रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।
कछुए का मुंह किस तरफ होना चाहिए?
अगर घर में धातु का कछुआ रखा जा रहा है तो उसका मुंह घर के अंदर की ओर होना चाहिए। वास्तु मान्यता के अनुसार कछुए का मुंह अंदर की तरफ रखने से घर में बरकत आती है और कामकाज में सकारात्मक प्रगति बनी रहती है।



