
नई दिल्ली: आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के बाद देश के तीन से चार और आईआईटी संस्थान अगले वर्ष से चार साल का बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी डिग्री कोर्स शुरू कर सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए अगले वर्ष जेईई मेन के बजाय अलग प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी है। चयन प्रक्रिया में एप्टीट्यूड टेस्ट और हैकाथॉन को शामिल किया जा सकता है।
जेईई मेन की जगह होगा अलग प्रवेश परीक्षण
बी साइबर कार्यक्रम का प्रस्ताव रखने वाले आईआईटी कानपुर के वाधवानी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स के प्रोफेसर सोमित्र सनाध्या ने कहा कि अगले साल से प्रवेश प्रक्रिया में जेईई मेन को हटाने की योजना है।
उनके मुताबिक, शुरुआत में अभ्यर्थियों की क्षमता जांचने के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट कराया जाएगा। इसके बाद कुछ सौ अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया के अगले चरण के लिए बुलाया जा सकता है। इसमें भाग लेने वाले आईआईटी संस्थानों के साथ मिलकर हैकाथॉन आयोजित कर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
इस वर्ष आईआईटी कानपुर ने चार वर्षीय बी साइबर कार्यक्रम के लिए 40 सीटें और आईआईटी मद्रास ने 50 सीटें रखी थीं। दोनों संस्थान सभी सीटें नहीं भर सके। आईआईटी कानपुर में 32 और आईआईटी मद्रास में 20 विद्यार्थियों को दाखिला मिला। इस तरह कुल 52 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
तीन से चार और आईआईटी हो सकते हैं शामिल
प्रोफेसर सोमित्र सनाध्या ने कहा कि दोनों संस्थानों को अगले वर्ष सभी उपलब्ध सीटें भरने की उम्मीद है। पुराने और नए दोनों तरह के कई आईआईटी संस्थान इस कार्यक्रम को शुरू करने को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
उनके अनुसार, अगले साल प्रवेश परीक्षा आयोजित होने तक तीन से चार और आईआईटी संस्थानों के इस पहल से जुड़ने की काफी संभावना है।
सीटों की संख्या तीन गुना तक बढ़ने की संभावना
सनाध्या के मुताबिक, आगे चलकर इस पाठ्यक्रम में सीटों की कुल संख्या मौजूदा संख्या से करीब तीन गुना तक हो सकती है। प्रस्तावित एप्टीट्यूड टेस्ट में समस्या समाधान क्षमता और कंप्यूटर विज्ञान की बुनियादी दक्षताओं को परखा जाएगा। इसमें प्रोग्रामिंग और नेटवर्किंग जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने पर अभी चर्चा चल रही है। अंतिम पाठ्यक्रम और परीक्षा कार्यक्रम अगले तीन से चार महीनों में घोषित किए जाने की उम्मीद है। इस वर्ष जेईई मेन का इस्तेमाल केवल शुरुआती कटऑफ के तौर पर किया गया था, जिसके बाद हैकाथॉन आयोजित किया गया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की कमी दूर करने पर जोर
सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी को देखते हुए बनाई जा रही है। वाधवानी स्कूल के पहले डीन नितिन सक्सेना के अनुसार, यह कार्यक्रम बढ़ती साइबर घटनाओं और देश में साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रतिभाशाली पेशेवर तैयार करने की क्षमता के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों और साइबर सुरक्षा से जुड़ी डिग्री की संख्या कम होने के कारण यह क्षेत्र अभी भी औपचारिक रूप से अपनी जगह बना रहा है।
अगले 5 से 10 साल में 15 फीसदी सालाना बढ़ सकता है बाजार
नितिन सक्सेना ने अनुमान जताया कि अगले पांच से 10 वर्षों में साइबर सुरक्षा बाजार हर साल करीब 15 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, बड़े संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या इसी गति से बढ़ पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में अगले दशक में भी उद्योग और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों तथा संस्थानों से मिलने वाले मानव संसाधन के बीच अंतर बना रह सकता है।
उनका कहना है कि यही कमी स्नातकों के लिए रोजगार के बेहतर अवसरों में बदल सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए मांग और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ने की संभावना है।
पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा के साथ एआई और कंप्यूटर विज्ञान
इस डिग्री कार्यक्रम के पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सिस्टम्स से जुड़े विषय शामिल हैं। विद्यार्थियों को सरकारी संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ परियोजनाओं तथा इंटर्नशिप के जरिए व्यावहारिक अनुभव देने की योजना है।
नितिन सक्सेना के अनुसार, यह कार्यक्रम ऐसे विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो केवल सैद्धांतिक पढ़ाई के बजाय सिस्टम्स को समझने में रुचि रखते हैं। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशक में एआई से जुड़ी कई तकनीकों का भी इसमें इस्तेमाल किया जाएगा।



