
यूपी में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का बड़ा असर, 8.25 लाख घरों की छत पर सोलर प्लांट; रोज बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली
लखनऊ: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं और कुल 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित हो गई है। इन संयंत्रों से हर दिन करीब 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश घरेलू छत आधारित सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के उत्पादन के आधार पर यह बिजली ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से प्रतिदिन करीब ₹8.10 करोड़ मूल्य की बिजली के बराबर है। इस हिसाब से प्रदेश में हर साल लगभग ₹2,956 करोड़ की बचत या आर्थिक लाभ का अनुमान है, जिसका सीधा फायदा घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को मिल रहा है।
सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के उपभोक्ता बिल विवरण के मुताबिक जून 2026 में प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा। इसका मतलब है कि इन परिवारों को उस महीने बिजली के लिए भुगतान नहीं करना पड़ा या उनके खाते में क्रेडिट दर्ज हुआ।
ऋणात्मक बिल उस स्थिति में बनता है, जब उपभोक्ता ग्रिड से जितनी बिजली लेता है, उससे अधिक बिजली ग्रिड को देता है। अतिरिक्त बिजली की राशि या यूनिट का समायोजन आने वाले बिजली बिलों में किया जाता है।
₹7,300 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता से बढ़ी पहुंच
योजना के तहत उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को अब तक ₹5,400 करोड़ से अधिक की केंद्रीय वित्तीय सहायता मिल चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को ₹1,900 करोड़ से अधिक का राज्य अनुदान दिया गया है। इस तरह केंद्र और राज्य की ओर से कुल ₹7,300 करोड़ से अधिक की सहायता ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर संयंत्र लगाना अधिक सुलभ और किफायती बनाया है।
हर साल 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान
प्रदेश में स्थापित 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता से हर साल करीब 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। यह मात्रा करीब 16.5 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक साल में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा के बराबर बताई गई है।
छतों पर सौर संयंत्र लगाने के मॉडल से करीब 10,617 एकड़ जमीन को बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों के इस्तेमाल से बचाया जा रहा है। इससे कृषि, आवासीय और अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए जमीन सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
85 हजार से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से प्रदेश में 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार हुआ है। स्थापित सौर क्षमता बढ़ने के साथ इन रोजगार अवसरों के और बढ़ने की संभावना है। अभियंताओं, तकनीशियनों, बिजलीकर्मियों, सर्वेक्षकों, पर्यवेक्षकों, आपूर्ति और परिवहन से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ अनुरक्षण सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते खुले हैं।
प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सौर विक्रेताओं का नेटवर्क उपभोक्ताओं को सर्वेक्षण, डिजाइन, संयंत्र स्थापना, विद्युत संयोजन, निरीक्षण, संयंत्र चालू करने और अनुरक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
31 मार्च 2027 तक पूरा करना है योजना का क्रियान्वयन
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इस अवधि में आवेदन से लेकर सौर संयंत्र की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान तक की प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं।
इन सभी चरणों में समय लगने के कारण अंतिम समय तक आवेदन का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है।
पंजीकृत वेंडर के जरिए भी कर सकते हैं आवेदन
इच्छुक घरेलू उपभोक्ताओं से जल्द आवेदन करने की अपील की गई है। उपभोक्ता राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in या अपने विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इससे केंद्र सरकार की सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त अनुदान का लाभ समय रहते लिया जा सकेगा।
सौर संयंत्र जितनी जल्दी स्थापित होगा, उपभोक्ताओं को उतने ही अधिक महीनों तक बिजली बिल में बचत और मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकेगा।



