राष्ट्रीय

पैसे और पावर से जमानत का दावा? SC ने कहा- जेल से बाहर आया तो आजादी का जश्न मनाना गलत कैसे

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने आजादी का जश्न मनाया, तो इसमें गलत क्या है। शिकायतकर्ता ने आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो को आधार बनाकर दावा किया था कि उसने पैसे और प्रभाव के दम पर जमानत हासिल की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वीडियो से ऐसा नहीं लगता कि आरोपी ने किसी तरह के प्रभाव का इस्तेमाल कर जमानत हासिल की।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। आरोपी को हाई कोर्ट से पांचवीं याचिका पर जमानत मिली थी। इससे पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।

सोशल मीडिया वीडियो पर उठे थे सवाल

जमानत मिलने के बाद आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें उसने कहा था कि इस देश में पैसे और पावर के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। शिकायतकर्ता ने इसी वीडियो को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी अगर अपनी आजादी का जश्न मना रहा था तो इसमें गलत क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके बयान से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उसने पैसे या प्रभाव के दम पर जमानत हासिल की।

कोर्ट ने कहा- अगर पैसे होते तो जेल क्यों जाता?

सुनवाई से पहले पीठ ने टिप्पणी की कि जेल से बाहर आना आरोपी के लिए एक उपलब्धि हो सकती है और आजादी मिलने पर उसका जश्न मनाना गलत नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि अगर आरोपी के पास इतना पैसा ही होता कि वह प्रभाव का इस्तेमाल कर जमानत हासिल कर सके, तो वह जेल में गया ही क्यों होता। पीठ ने वकीलों की फीस का भी उल्लेख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

जमीन विवाद में हुई थी हत्या

यह मामला हरियाणा के बेरला गांव का है। आरोपी का अपने पड़ोसी के साथ जमीन को लेकर विवाद था। दोनों एक जमीन पर अपना-अपना दावा कर रहे थे। अभियोजन के अनुसार, जब विरोधी पक्ष वहां टिन शेड रखने लगा तो विवाद बढ़ गया।

आरोप है कि आरोपी ने एक महिला के सिर पर डंडे से वार किया, जिससे उसे चोट लगी। वहीं उसके पति पर कुल्हाड़ी से हमला किए जाने का आरोप था। बाद में महिला के पति की मौत हो गई।

घटना के बाद आरोपी को अक्टूबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2024 में सेशन कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी चार याचिकाएं लगातार खारिज हुईं। आखिरकार 23 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी हाई कोर्ट ने किया था जिक्र

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी पर लगाए गए आरोप पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। कोर्ट के मुताबिक मृतक के शरीर पर धारदार हथियार से चोट के निशान नहीं मिले थे। वहीं घटनास्थल से भी कुल्हाड़ी के बजाय डंडा बरामद होने की बात सामने आई थी।

आरोपी करीब साढ़े तीन साल जेल में रहा। उसके मामले में 8 गवाहों की अदालत में गवाही भी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने उसके मामले में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार का भी उल्लेख किया।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो से संकेत मिलता है कि उसने जमानत हासिल करने के लिए पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

Related Articles

Back to top button