मनोरंजन

पांच बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं शबाना आजमी, कभी 30 रुपये रोज में बेचती थीं कॉफी; ऐसे शुरू हुआ सफर

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा में शबाना आजमी का नाम उन अभिनेत्रियों में शामिल है, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना उनके लंबे फिल्मी करियर की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। हालांकि, फिल्मों में पहचान बनाने से पहले उनकी जिंदगी में ऐसा दौर भी आया, जब वह अपनी पॉकेट मनी के लिए काम करती थीं।

शबाना आजमी ने वर्ष 1974 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ से अभिनय की शुरुआत की थी। फिल्म में उन्होंने एक ग्रामीण महिला का किरदार निभाया था। अपने शुरुआती फिल्मी प्रयास में ही उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया।

इसके बाद उन्होंने अलग-अलग विषयों और चुनौतीपूर्ण किरदारों वाली फिल्मों में काम किया। वर्ष 1982 में आई ‘अर्थ’ में उन्होंने वैवाहिक जीवन के संघर्षों से जुड़ी भूमिका निभाई। इस फिल्म के लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

‘खंडहर’ और ‘पार’ के लिए भी मिला राष्ट्रीय सम्मान

वर्ष 1983 में शबाना आजमी की फिल्म ‘खंडहर’ रिलीज हुई। मृणाल सेन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके अभिनय को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला और वह तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार की विजेता बनीं।

इसके अगले साल यानी 1984 में उन्होंने गौतम घोष की फिल्म ‘पार’ में रामा का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्हें चौथी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

वर्ष 1998 में फिल्म ‘गॉडमदर’ के साथ उनकी राष्ट्रीय पुरस्कार यात्रा पांचवें सम्मान तक पहुंची। फिल्म में उन्होंने रामबाई की भूमिका निभाई थी। इस किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया।

कॉलेज के दिनों में पॉकेट मनी के लिए बेचती थीं कॉफी

फिल्मों में नाम कमाने से पहले शबाना आजमी ने अपनी पॉकेट मनी के लिए खुद काम किया था। वह प्रसिद्ध कवि कैफी आजमी और थिएटर कलाकार शौकत आजमी की बेटी हैं, लेकिन कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी जरूरतों के लिए काम करके पैसे कमाए।

उन्होंने मुंबई के एक पेट्रोल पंप पर कॉफी प्रमोटर के तौर पर काम किया था। वहां आने वाले लोगों को कॉफी बेचने के बदले उन्हें रोजाना 30 रुपये मिलते थे। उस दौर में यह काम उनके लिए पॉकेट मनी जुटाने का जरिया था।

एफटीआईआई से सीखी एक्टिंग, गोल्ड मेडल भी हासिल किया

शबाना आजमी ने अभिनय की औपचारिक शिक्षा पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से हासिल की। उन्होंने वहां एक्टिंग का कोर्स पूरा किया और गोल्ड मेडल भी हासिल किया। इसके बाद ‘अंकुर’ से शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर लगातार आगे बढ़ता गया।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा शबाना आजमी को पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान भी मिल चुके हैं। उनके करियर में कई तरह की भूमिकाएं शामिल रही हैं, लेकिन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हैं।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन और ममूटी चार-चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। वहीं, शबाना आजमी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में पांच बार यह सम्मान जीतकर अपना अलग रिकॉर्ड बनाया है।

Related Articles

Back to top button