RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, होम और कार लोन होंगे महंगे; बढ़ सकती है EMI

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। करीब साढ़े तीन साल से यह दर 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई थी। रेपो रेट बढ़ने के बाद होम लोन और कार लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है, जिसका असर ग्राहकों की ईएमआई पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के उल्लेख से की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने के खतरे को लेकर चिंता जताई। ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर खाने-पीने की वस्तुओं सहित अन्य सामानों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महंगाई का जोखिम और शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल अभी भी बना हुआ है।
2026 में चौथी मौद्रिक नीति बैठक में बदली दर
साल 2026 में यह आरबीआई की चौथी मौद्रिक नीति समिति की बैठक थी। इससे पहले अप्रैल, जून और अगस्त में हुई बैठकों में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया था। हालांकि, इस बार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव को देखते हुए विशेषज्ञ पहले से ही रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जता रहे थे। अब आरबीआई ने भी दर बढ़ाने का फैसला कर दिया है।
रेपो रेट बढ़ने से क्यों बढ़ सकता है ईएमआई का बोझ?
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए कर्ज देता है। इस दर में बदलाव का असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ता है और इसके बाद बैंक ग्राहकों के लिए कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। इसलिए रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, कार लोन जैसे कर्ज महंगे होने की संभावना रहती है।
रेपो रेट घटने पर मिलती है राहत
इसके उलट अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है तो बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। इसका फायदा ग्राहकों तक पहुंचने पर लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं और ईएमआई का बोझ घट सकता है। इसी वजह से आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के फैसले पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों की खास नजर रहती है।



