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‘छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की दयनीय हालत देखिए’, हत्या के मामले में फैसले पर SC नाराज, जजों की समझ पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। हत्या के एक मामले में हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दर्ज दोषसिद्धि को बदलकर धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला बना दिया था। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसकी स्थिति को दयनीय बताया।

‘जजों को कानून के बुनियादी सिद्धांत तक नहीं पता’

जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “जरा हाई कोर्ट की दयनीय हालत तो देखिए… जजों को यह तक नहीं पता कि IPC की धारा 304 पार्ट I और 304 पार्ट II क्या है। और आप उम्मीद करते हैं कि जज सबूतों को समझेंगे।”

पीठ ने यह भी कहा कि इस तरह का मामला पहली बार उसके सामने नहीं आया है। अदालत के मुताबिक, ये कानून के ऐसे बुनियादी सिद्धांत हैं, जिन्हें कानून की पढ़ाई के शुरुआती वर्ष में ही पढ़ाया जाता है।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता पर सरायपाली की अतिरिक्त सत्र अदालत में IPC की धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा चलाया गया था। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

इसके बाद दोषी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में फैसले को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हत्या की दोषसिद्धि को बदल दिया। इसी बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

हत्या की धारा बदलने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपील पर फैसला करते समय कानून के प्रावधानों और मामले से जुड़े तथ्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि हाई कोर्ट ने चोटों की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियार और घटना की शुरुआत जैसे अहम पहलुओं पर उचित विचार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता का कहना है कि हाई कोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद मौखिक गवाही को सही ढंग से समझने में नाकाम रहा। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा की जरूरत पर सवाल उठाया है।

याचिकाकर्ता और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर पूछा है कि हाई कोर्ट के आदेश को रद्द क्यों न किया जाए और हत्या के मामले में दोषसिद्धि तथा उम्रकैद की सजा सुनाने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को क्यों न बहाल किया जाए।

अदालत अब मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी। फिलहाल, हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आपत्तियां सामने आई हैं, लेकिन अंतिम निर्णय शीर्ष अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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