दिल्ली में भरोसे का कत्ल! जिनके हाथों में सौंपी घर की चाबी, वही बने लुटेरे; 20 महीने में 173 केस, 208 गिरफ्तार

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में घरों और कारोबार की सुरक्षा के लिए जिन घरेलू सहायकों और कर्मचारियों पर भरोसा किया जाता है, उन्हीं में से कुछ लोग मालिकों की संपत्ति लूटने और चोरी करने के मामलों में शामिल पाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 20 महीनों में कर्मचारियों से जुड़े 173 मामलों में 208 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, वर्ष 2020 से 2025 के बीच घरेलू सहायकों द्वारा चोरी और लूट की 750 से अधिक वारदात सामने आने की बात कही गई है। इन घटनाओं ने कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले पहचान और पुलिस सत्यापन की जरूरत को फिर चर्चा में ला दिया है।
20 महीने में 173 मामले, 208 गिरफ्तारियां
दिल्ली में कर्मचारियों से जुड़ी आपराधिक घटनाओं के कई मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं। जखीरा फ्लाईओवर के पास एक व्यवसायी के कर्मचारी ने 36 लाख रुपये की फर्जी लूट की कहानी रची। वहीं, भारत नगर में एक घरेलू सहायिका ने मकान मालिक के विदेश जाने का फायदा उठाकर घर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, अगस्त 2026 तक कर्मचारियों द्वारा की गई चोरी के 62 मामले दर्ज किए गए और 69 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले वर्ष 2025 में ऐसे 111 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 139 गिरफ्तारियां की गईं। इन आंकड़ों को मिलाकर पिछले 20 महीनों में कुल 173 मामलों में 208 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
जल्दी अमीर बनने की चाह, गिरोहों की साजिश भी वजह
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह कर्मचारियों के अपराध में शामिल होने की एक प्रमुख वजह है। कई मामलों में संगठित गिरोह कर्मचारियों को लालच देकर अपने साथ मिला लेते हैं और घरों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में चोरी की योजना बनाते हैं।
घरेलू सहायकों और कर्मचारियों को घर के भीतर की गतिविधियों, लॉकर, नकदी, आभूषणों और परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी रहती है। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर आरोपी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाते हैं। करोल बाग में मोबाइल की एक दुकान से एक करोड़ रुपये की चोरी के मामले में भी चार साल से काम कर रहे पुराने कर्मचारी को मुख्य साजिशकर्ता पाया गया था।
पांच साल में 750 से अधिक वारदात, सैकड़ों गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से 2025 के बीच राजधानी में घरेलू सहायकों द्वारा चोरी और लूट की 750 से अधिक घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में करीब 650 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई मामलों में कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था।
वर्ष 2020 से 2024 तक के दर्ज आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020 में 106 प्राथमिकी दर्ज हुईं और 74 गिरफ्तारियां की गईं। वर्ष 2021 में 154 मामलों में 157 लोग गिरफ्तार हुए। 2022 में 164 प्राथमिकी और 151 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। वर्ष 2023 में 119 मामलों में 88 और 2024 में 106 मामलों में 94 गिरफ्तारियां हुईं।
दिल्ली में कर्मचारियों से जुड़ीं बड़ी आपराधिक वारदातें
20 अप्रैल 2026 को लुटियंस दिल्ली के गोल्फ लिंक्स इलाके में शराब कारोबारी के घर डकैती हुई। आरोप है कि घरेलू नौकर सुशील उर्फ गुड्डू कुमार कामत ने अपने सात अन्य साथियों के साथ मिलकर घर में मौजूद लोगों को बंधक बनाया और करीब 30 लाख रुपये के आभूषण व नकदी लूटकर फरार हो गया। इस मामले में कर्मचारी की भूमिका सामने आई, जिसे वारदात से करीब एक सप्ताह पहले ही काम पर रखा गया था।
जुलाई 2025 में लाजपत नगर में पैसों को लेकर विवाद और डांट-फटकार के बाद एक घरेलू सहायक पर अपनी मालकिन रुचिका सेवानी और उनके 14 वर्षीय बेटे की गला रेतकर हत्या करने का आरोप लगा।
मई 2024 में दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक डॉक्टर की उनके घरेलू सहायक और उसके साथियों ने हत्या कर दी थी। आरोपितों ने लूटपाट के इरादे से डॉक्टर को बंधक बनाया और फिर उनकी हत्या कर दी।
जुलाई 2021 में वसंत विहार में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. रंगराजन कुमारमंगलम की पत्नी और वकील किट्टी कुमारमंगलम की उनके धोबी और उसके दो साथियों ने गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस वारदात के पीछे लूटपाट का मकसद बताया गया था।
जुलाई 2014 में ग्रेटर कैलाश-2 में घरेलू सहायक नीरज साकी ने 81 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म करने के बाद उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। आरोपित ने सबूत मिटाने के लिए शव को आग भी लगा दी थी।
फर्जी पहचान और झूठी सिफारिशों से घरों में घुसते हैं आरोपी
पुलिस के मुताबिक, कुछ गिरोह सुनियोजित तरीके से अपने सदस्यों को फर्जी दस्तावेजों या झूठी सिफारिशों के सहारे घरेलू सहायक अथवा कर्मचारी बनाकर घरों और प्रतिष्ठानों में रखवाते हैं। इसके बाद वे अंदरूनी जानकारी जुटाकर वारदात को अंजाम देते हैं।
अप्रैल 2026 में गोल्फ लिंक्स इलाके में हुई डकैती के मामले में भी हाल ही में काम पर रखे गए नौकर की भूमिका सामने आई थी। आरोप है कि उसने गिरोह के हथियारबंद सदस्यों के लिए घर का मुख्य दरवाजा खोला था, जिसके बाद बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया।
दिल्ली पुलिस की अपील, कर्मचारी रखने से पहले कराएं सत्यापन
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि घरेलू सहायक, ड्राइवर, दुकानों के कर्मचारियों या अन्य किसी व्यक्ति को काम पर रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। नियोक्ताओं को कर्मचारी का पहचान पत्र, स्थायी पता, पारिवारिक संपर्क और बैंक संबंधी विवरण भी सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी पहचान की जा सके।
कैसे कराएं घरेलू सहायक का पुलिस सत्यापन?
दिल्ली के थानों में घरेलू सहायकों के सत्यापन के लिए आवेदन फॉर्म उपलब्ध होते हैं। मकान मालिक या नियोक्ता को फॉर्म में कर्मचारी की तस्वीर, आधार कार्ड नंबर, स्थायी पता और पिछले नियोक्ता का विवरण भरकर संबंधित थाने में जमा करना होता है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस के आवेदन के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।



