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हरियाणा में बिजली हड़ताल खत्म कराने में अनिल विज की अहम भूमिका, रात 2 बजे तक चली बैठक; HERC के फैसले को कानूनी चुनौती देगी सरकार

चंडीगढ़: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने के प्रयासों के बीच ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच सहमति बनाने की पहल की। उन्होंने अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ देर रात तक बैठक कर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के फैसले, कर्मचारियों की मांगों और कानूनी विकल्पों पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान रात करीब दो बजे तक मंथन चला। सरकार अब आयोग के निर्णय के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

पंचकूला में देर रात तक अधिकारियों से चर्चा

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुरू होने के बाद अनिल विज अंबाला जाने के बजाय पंचकूला रेस्ट हाउस में रुके। यहां उन्होंने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ लंबी बैठक की। चर्चा में कर्मचारी संगठनों की मांगों, HERC के फैसले और सरकार के सामने उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया गया।

इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी नेताओं के साथ बातचीत के जरिए सहमति बनाने का प्रयास किया गया। विज का जोर कर्मचारियों की आशंकाएं दूर करने और निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के मामले में सरकार का पक्ष स्पष्ट करने पर रहा।

निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का पहले से विरोध

अनिल विज मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में इस मामले पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके थे। उनके मुताबिक, राज्य सरकार का बिजली वितरण के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं था और उसने किसी निजी कंपनी से लाइसेंस के लिए आवेदन भी आमंत्रित नहीं किए थे।

विज ने कहा था कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत संबंधित व्यक्ति आयोग के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि HERC के फैसले के खिलाफ राजनीतिक दल अपना पक्ष रख सकते हैं। उनके अनुसार, राज्य सरकार शुरुआत से ही इस निर्णय का विरोध कर रही है।

धारा 108 और 94 के तहत कानूनी कार्रवाई की तैयारी

कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद कानूनी विकल्पों पर आगे बढ़ने को लेकर सहमति बनी। विज के अनुसार, विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत राज्य सरकार आयोग को आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। इस संबंध में अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, सरकार विद्युत अधिनियम की धारा 94 के तहत HERC के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली कार्रवाई पर चर्चा के लिए तीन नवंबर को चंडीगढ़ में बैठक निर्धारित की गई है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी स्पष्ट किया सरकार का रुख

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मीडिया और बिजली कर्मचारी नेताओं के सामने कहा कि अनिल विज विधानसभा में ही सरकार का पक्ष स्पष्ट कर चुके थे। सरकार का रुख है कि निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले का विरोध कानूनी प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

तीन नवंबर की बैठक पर रहेगी नजर

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान अनिल विज ने विभागीय अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों, मुख्यमंत्री और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की। अब आगे की स्थिति प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई और तीन नवंबर को होने वाली बैठक पर निर्भर करेगी।

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