
चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। सितंबर 2026 के राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर राज्य शीर्ष पर रहा। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के अनुसार, हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने तीनों नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू किया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 शामिल हैं। ये कानून एक जुलाई 2024 से प्रभावी हुए थे।
पुलिस के मुताबिक, ई-समन व्यवस्था के जरिए छह महीने में 25.65 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हुई। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करने से सात महीने में 1.16 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत दर्ज की गई। इसके अलावा, जीरो एफआईआर की साप्ताहिक समीक्षा और सामान्यतः 48 घंटे के भीतर उसे नियमित एफआईआर में बदलने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हरियाणा पुलिस वैज्ञानिक जांच, तकनीकी नवाचार, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और अदालतों के साथ बेहतर तालमेल के जरिए न्याय प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर काम कर रही है।
99.2 प्रतिशत फॉरेंसिक जांच की हो रही रिकॉर्डिंग
हरियाणा पुलिस ने सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम की शत-प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित की है। ई-साक्ष्य ऐप के जरिए 99.2 प्रतिशत फॉरेंसिक जांच की रिकॉर्डिंग की जा रही है।
फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की संख्या भी 351 से बढ़ाकर 1,044 कर दी गई है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैनात की गई है। पुलिस के अनुसार, 17 नई मोबाइल फॉरेंसिक इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है।
56 हजार पुलिसकर्मियों का पोर्टल पर पंजीकरण
अजय सिंघल के अनुसार, हरियाणा पुलिस के सभी कर्मियों को नए आपराधिक कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, 56 हजार पुलिसकर्मियों का आईजीओटी पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है। इनमें से 34,500 कर्मियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालतों में पेशी
राज्य में कुल 2,145 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से 81.78 प्रतिशत आरोपित अदालतों में पेश हो रहे हैं। जेलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपितों की पेशी का आंकड़ा 84.49 प्रतिशत है। इसके अलावा, करीब 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में पेश हो रहे हैं।



