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धरती के बाद अब अंतरिक्ष में भी जंग! अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे के स्पेस सिस्टम को बनाया निशाना? रिपोर्ट के दावे से मची हलचल

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को लेकर अब अंतरिक्ष में भी कार्रवाई किए जाने का दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे में पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि दोनों देशों ने युद्ध के दौरान एक-दूसरे के अंतरिक्ष तंत्र को कमजोर करने की कोशिश की। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित रिपोर्ट का वह हिस्सा भी सार्वजनिक नहीं हुआ है, जिससे इसकी सत्यता स्थापित हो सके। ऐसे में फिलहाल इस खबर को एक अपुष्ट दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

आखिर क्यों सैन्य ठिकानों के लिए अहम हैं सैटेलाइट?

आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इनका इस्तेमाल केवल संचार, टेलीविजन प्रसारण और मौसम की जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सैन्य अभियान भी काफी हद तक इन पर निर्भर करते हैं। सैटेलाइट की मदद से सेनाएं दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखती हैं, सैन्य ठिकानों की जानकारी जुटाती हैं और सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखती हैं।

इसके अलावा, नेविगेशन व्यवस्था के जरिए विमान और दूसरे सैन्य उपकरण अपनी स्थिति और दिशा का पता लगा सकते हैं। ऐसे में सैटेलाइट या उनसे जुड़े तंत्र में बाधा आने से सैन्य अभियानों की निगरानी, संचार और संचालन प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीक अब देशों की सैन्य सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है।

ईरान के दो स्पेस सेंटरों को नुकसान, लेकिन गुप्त हमलों की पुष्टि नहीं

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के 14 अक्टूबर 2026 को जारी विश्लेषण में ईरान के दो अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्रों को हुए नुकसान का उल्लेख किया गया है। इनमें इमाम खोमैनी स्पेस सेंटर और शाहरोद स्पेस सेंटर शामिल हैं। उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों में इन केंद्रों पर नुकसान के संकेत दिखाई दिए थे। यह नुकसान अमेरिका और इजरायल के हमलों से जुड़ा बताया गया।

हालांकि, इन केंद्रों को हुए नुकसान से इस दावे की पुष्टि नहीं होती कि अमेरिका और ईरान ने गुप्त रूप से एक-दूसरे के अंतरिक्ष तंत्र को भी निशाना बनाया था। दोनों देशों के बीच कथित कार्रवाई में किन सैटेलाइट या प्रणालियों को निशाना बनाया गया, इसकी जानकारी भी अब तक सामने नहीं आई है।

स्पेस सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के क्या हैं तरीके?

किसी देश के अंतरिक्ष तंत्र को प्रभावित करने के कई तरीके हो सकते हैं। इनमें सैटेलाइट के संकेतों में बाधा डालना, संचार व्यवस्था को बाधित करना और जमीन पर मौजूद उन केंद्रों को निशाना बनाना शामिल है, जहां से सैटेलाइट का संचालन और नियंत्रण किया जाता है।

इसके अलावा, साइबर हमलों के जरिए भी सैटेलाइट से जुड़ी प्रणालियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ये अंतरिक्ष प्रणालियों को बाधित करने के सामान्य तरीके हैं। अमेरिका और ईरान के बीच कथित कार्रवाई में इनमें से किसी तरीके का इस्तेमाल हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

अंतरिक्ष में क्यों बढ़ रही है देशों के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा?

दुनिया के कई देश अब अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अंतरिक्ष तकनीक पर निर्भर हैं। सैटेलाइट की मदद से निगरानी, संचार, नेविगेशन और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल की जाती है। ऐसे में अंतरिक्ष में मौजूद प्रणालियों की सुरक्षा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

यदि किसी देश के सैटेलाइट या उनसे जुड़े नियंत्रण केंद्र प्रभावित होते हैं, तो उसकी सेना की सूचनाएं जुटाने और संपर्क बनाए रखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसी कारण विभिन्न देश अपनी अंतरिक्ष तकनीक की सुरक्षा मजबूत करने और संभावित खतरों से निपटने पर ध्यान दे रहे हैं।

अमेरिका-ईरान के कथित स्पेस वॉर पर अभी सस्पेंस

अमेरिका और ईरान द्वारा एक-दूसरे के अंतरिक्ष तंत्र को निशाना बनाए जाने के दावे की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न तो कथित रूप से प्रभावित प्रणालियों का स्पष्ट विवरण सामने आया है और न ही कार्रवाई के तरीके की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में भी गुप्त युद्ध छिड़ गया था। संबंधित रिपोर्ट का पूरा विवरण और ठोस प्रमाण सामने आने के बाद ही इस दावे की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल अंतरिक्ष प्रणालियों को निशाना बनाए जाने की खबर अपुष्ट है।

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