
नई दिल्ली: पांच दिवसीय दीपोत्सव में छोटी दिवाली का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी, नरक चौदस, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष छोटी दिवाली 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा करने के साथ दीपदान की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से पूजा और दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके अलावा इस दिन अभ्यंग स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू हो चुकी है और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के आधार पर छोटी दिवाली का पर्व 7 नवंबर को मनाया जा रहा है।
छोटी दिवाली 2026 के शुभ मुहूर्त
छोटी दिवाली पर सुबह अभ्यंग स्नान और शाम को यमराज के नाम दीपदान करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय से पहले स्नान करने और शाम को घर के बाहर दीपक जलाने से सुख-शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- छोटी दिवाली: 7 नवंबर 2026, शनिवार
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर, सुबह 11:47 बजे
- अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक
- चंद्रोदय का समय: शाम 5:41 बजे
- यम दीपदान मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से 5:57 बजे तक
- सायाह्न संध्या मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से 6:50 बजे तक
छोटी दिवाली पर ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा
छोटी दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके उबटन लगाना चाहिए। इसके बाद स्नान करना शुभ माना जाता है। इस धार्मिक प्रक्रिया को अभ्यंग स्नान कहा जाता है। मान्यता है कि इससे आरोग्य, सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। उन्हें फूल, चंदन, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें। भगवान का स्मरण करते हुए नरकासुर वध की पौराणिक कथा सुनें।
शाम के समय घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को अन्न और वस्त्र दान करना भी शुभ माना जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध, तभी से मनाई जाती है छोटी दिवाली
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में नरकासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। देवता, ऋषि-मुनि और आम लोग उसके उत्पीड़न से परेशान थे। नरकासुर ने 16 हजार से अधिक कन्याओं को भी बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।
कथा के अनुसार, नरकासुर को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसका वध उसकी माता के हाथों ही हो सकता था। उसकी माता भूमिदेवी थीं और भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा को भूमिदेवी का अवतार माना जाता है। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण सत्यभामा को अपने साथ लेकर नरकासुर से युद्ध करने पहुंचे।
युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। इसी बीच नरकासुर के एक प्रहार के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने मूर्छित होने का नाटक किया। यह देखकर सत्यभामा क्रोधित हो गईं और उन्होंने नरकासुर पर बाण चला दिया। इस तरह नरकासुर का अंत हुआ और उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति मिली।
नरकासुर की मृत्यु के बाद उसकी कैद में रखी गई सभी कन्याओं को मुक्त कराया गया। पौराणिक कथा के अनुसार, मृत्यु से पहले नरकासुर ने भगवान श्रीकृष्ण से वरदान मांगा था कि उसकी मृत्यु के दिन को लोग शोक के बजाय उत्सव के रूप में मनाएं। भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी इच्छा स्वीकार कर ली।
इसके बाद नरकासुर के अंत की खुशी में लोगों ने दीपक जलाकर उत्सव मनाया। तभी से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है।
छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से क्यों किया जाता है दीपदान?
छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है।
मान्यता है कि यमराज के नाम पर दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन मुख्य द्वार के अलावा घर के अन्य हिस्सों में भी दीपक जलाकर रोशनी की जाती है। छोटी दिवाली का पर्व लोगों को बुराई का त्याग करने, अच्छे कर्म अपनाने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है।



