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AI पर अर्चना पूरन सिंह का बड़ा बयान, बोलीं- बढ़ती तकनीक पानी के संकट को दे रही बढ़ावा, छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जिंदगी और काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। शिक्षा, कारोबार, कंटेंट निर्माण, स्वास्थ्य और मनोरंजन समेत लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि, एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ इसके पर्यावरणीय असर को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने एआई तकनीक और पानी की बढ़ती खपत के बीच संबंध की बात कही है।

अर्चना पूरन सिंह ने अपने परिवार के साथ हुई बातचीत के दौरान कहा कि एआई के लगातार बढ़ते उपयोग का असर जल संसाधनों पर भी पड़ रहा है। उनका कहना था कि एआई आधारित प्रणालियों को संचालित करने के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की आवश्यकता होती है और हर बार किसी प्रश्न का उत्तर तैयार करने की प्रक्रिया में भी काफी मात्रा में पानी की खपत होती है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में यह स्थिति जल संकट को और गंभीर बना सकती है।

मुंबई के जल संकट पर चर्चा के दौरान उठा मुद्दा

जानकारी के मुताबिक यह बातचीत उस समय हुई जब अर्चना अपने बेटों आर्यमन और आयुष्मान के साथ मुंबई में पानी की कमी और बारिश की स्थिति पर चर्चा कर रही थीं। बातचीत के दौरान डेटा सेंटरों और एआई तकनीक से जुड़ी जल खपत का विषय सामने आया, जिसके बाद इस मुद्दे पर परिवार के सदस्यों ने अपने विचार साझा किए।

बेटों ने भी जताई चिंता

अर्चना के छोटे बेटे आयुष्मान ने बताया कि एआई आधारित वीडियो तैयार करते समय उन्हें जानकारी मिली थी कि इस तकनीक के संचालन से पानी की खपत बढ़ती है। यह जानने के बाद उन्होंने एआई टूल्स का इस्तेमाल सीमित कर दिया। वहीं आर्यमन का कहना था कि बड़ी संख्या में लोग एआई का उपयोग मनोरंजन और सामान्य प्रयोगों के लिए कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे छिपी पर्यावरणीय लागत पर कम ध्यान दिया जाता है।

डेटा सेंटरों की कूलिंग में होती है पानी की खपत

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एआई सीधे तौर पर पानी का उपयोग नहीं करता, लेकिन इसे संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए कई स्थानों पर पानी आधारित कूलिंग सिस्टम का सहारा लिया जाता है। सर्वर चौबीसों घंटे काम करते हैं, जिससे अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इस तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पानी और ऊर्जा दोनों की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि एआई के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की संसाधन खपत भी बढ़ती है।

जल संकट के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पानी की कमी के लिए केवल एआई को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। जलवायु परिवर्तन, भूजल का अत्यधिक दोहन, अनियोजित शहरीकरण, बढ़ती आबादी और जल प्रबंधन की चुनौतियां भी जल संकट के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में एआई की भूमिका पर चर्चा जरूरी है, लेकिन इसे अकेले समस्या की जड़ मानना उचित नहीं होगा।

ग्रीन टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरत

अर्चना पूरन सिंह का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर में ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में तकनीकी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। एआई के बढ़ते उपयोग के साथ टिकाऊ तकनीकों को अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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