अश्विन की पंत पर दो टूक, ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ कहकर खास छूट क्यों? फैसलों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन और उनके शॉट चयन को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। अश्विन का कहना है कि पंत से जिस स्तर के प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है, वह अब तक पूरी तरह सामने नहीं आया है। श्रीलंका के खिलाफ हालिया दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में पंत ने 168 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे। हालांकि, उनके आक्रामक अंदाज और कुछ शॉट के चयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
‘पंत से मेरी उम्मीदें अभी पूरी नहीं हुईं’
अपने यूट्यूब कार्यक्रम ‘एश की बात’ में अश्विन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में किसी खिलाड़ी के स्वाभाविक खेल को उसकी हर गलती का बचाव करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। उनके मुताबिक, बल्लेबाज को यह समझना जरूरी है कि मैच की स्थिति में टीम को किस तरह की बल्लेबाजी की जरूरत है।
अश्विन ने कहा कि ऋषभ पंत से उनकी उम्मीदें अभी पूरी नहीं हुई हैं। जब मैच की स्थिति टीम के पक्ष में हो, तब सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि पंत इसी तरह खेलते हैं। असली सवाल यह है कि उस समय टीम को बल्लेबाज से किस तरह के योगदान की जरूरत है।
‘टेस्ट हारने के लिए एक गलत फैसला काफी’
अश्विन ने पंत के आक्रामक क्रिकेट के बचाव में दिए जाने वाले तर्कों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी टीम के योगदान की जरूरत होती है, लेकिन मैच गंवाने के लिए एक गलत फैसला भी काफी हो सकता है।
उन्होंने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की पारियों की तारीफ की, लेकिन साथ ही कहा कि उन मुकाबलों में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी भारत की जीत में महत्वपूर्ण रहा था।
अश्विन के मुताबिक, टेस्ट मैच को तैयार करने और आखिरी सत्र में जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, लेकिन हार के लिए एक पल की गलत सोच भी भारी पड़ सकती है।
सहवाग और गिलक्रिस्ट से तुलना पर भी असहमति
अश्विन ने ऋषभ पंत की तुलना भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के महान विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट से किए जाने पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी आक्रामक क्रिकेट के लिए जाने जाते थे, लेकिन मैच की परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज करके जोखिम नहीं उठाते थे।
उनके अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब परिस्थितियों के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी को नियंत्रित रखना है। अश्विन ने कहा कि उन्हें पंत खिलाड़ी के रूप में पसंद हैं, लेकिन उन्हें अपने फैसले लेने की क्षमता में सुधार करने की जरूरत है।
‘एक खिलाड़ी को विशेष छूट क्यों?’
अश्विन ने पंत को ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ बताकर उन्हें अतिरिक्त समर्थन दिए जाने की दलील पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि अगर पंत को इस आधार पर विशेष भरोसा दिया जा रहा है तो युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों को भी उसी तरह का समर्थन मिलना चाहिए।
अश्विन ने कहा कि किसी एक खिलाड़ी को विशेष व्यवहार नहीं मिलना चाहिए। अगर एक पीढ़ी में आने वाले खिलाड़ी को इतना समर्थन दिया जाना है तो यही समर्थन बाकी खिलाड़ियों को भी मिलना चाहिए।
50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके पंत, अब जिम्मेदारी जरूरी
अश्विन ने पंत के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन्हें युवा या अनुभवहीन खिलाड़ी मानकर उनकी गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 50 से ज्यादा टेस्ट खेलने के बाद उनसे अधिक जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है।
उन्होंने कहा कि पंत अनुभवी खिलाड़ी हैं और 50 टेस्ट खेल चुके हैं। अब उन्हें जिम्मेदारी लेनी होगी। अश्विन के मुताबिक, उन्हें ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ कहकर उनकी गलतियों को सही ठहराने के बजाय उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, अश्विन ने यह भी कहा कि अगर पंत अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और फैसले लेने की क्षमता में सुधार करते हैं तो वह भविष्य में भारत के लिए तीनों प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।
प्रतिभा पर नहीं, फैसले लेने की क्षमता पर सवाल
अश्विन ने साफ किया कि उन्हें ऋषभ पंत की प्रतिभा पर कोई संदेह नहीं है। उनकी आपत्ति टेस्ट क्रिकेट में जोखिम उठाने के समय और मैच की परिस्थितियों के अनुरूप बल्लेबाजी करने को लेकर है।
उनके मुताबिक, पंत को अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल और टीम की जरूरत के बीच बेहतर संतुलन बनाना होगा। यही बदलाव उनके प्रदर्शन को और प्रभावी बना सकता है।



