तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश का बड़ा ऐलान! PM तारिक रहमान बोले- ‘हर हाल में होगा मास्टर प्लान लागू’, भारत की बढ़ीं रणनीतिक चिंताएं

ढाका: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने तीस्ता बैराज मास्टर प्लान को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर संसद में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण विकास योजनाओं में शामिल है और इसे किसी भी कीमत पर लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इसे उत्तरी बांग्लादेश में जल संकट के स्थायी समाधान, सिंचाई व्यवस्था के विस्तार और किसानों की आर्थिक मजबूती से जुड़ा राष्ट्रीय मिशन बताया।
रहमान ने कहा कि सरकार जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। इसी रणनीति के तहत अगले पांच वर्षों में देशभर में 20 हजार किलोमीटर लंबी नहरों की खुदाई और पुनर्खुदाई का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि अतिरिक्त वर्षा जल का बेहतर उपयोग किया जा सके और सूखे के मौसम में किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सके।
क्या है तीस्ता बैराज मास्टर प्लान?
तीस्ता बैराज मास्टर प्लान बांग्लादेश की एक महत्वाकांक्षी नदी प्रबंधन परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य तीस्ता नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करना, बाढ़ और नदी कटाव की समस्या को कम करना तथा उत्तरी जिलों में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाना है।
परियोजना के तहत नदी का गहरीकरण, नए बैराजों का निर्माण और आधुनिक सिंचाई नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। बांग्लादेश सरकार का दावा है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, जल संकट में कमी आएगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
चीनी सहयोग ने बढ़ाई चर्चा
इस परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा चीन की भागीदारी को लेकर हो रही है। तीस्ता बैराज मास्टर प्लान का प्रारूप चीन की सरकारी कंपनी ‘पावर चाइना’ ने तैयार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना के पहले चरण के लिए बांग्लादेश चीन से करीब 4,500 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी कर रहा है।
करीब 10 वर्षों में पूरी होने वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग एक अरब डॉलर बताई जा रही है। परियोजना में चीनी तकनीकी विशेषज्ञों और कंपनियों की संभावित भूमिका को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
तीस्ता नदी का उद्गम भारत के सिक्किम में होता है और यह पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से तीस्ता जल बंटवारे पर अंतिम समझौता नहीं हो पाया है। ऐसे में बांग्लादेश की इस परियोजना को केवल विकास योजना नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित परियोजना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, से 100 किलोमीटर से कम दूरी पर स्थित है। ऐसे में चीनी भागीदारी और सीमा क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को लेकर भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं।
20 हजार किलोमीटर नहर नेटवर्क पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संसद को बताया कि कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नदियों और नहरों की जल वहन क्षमता बहाल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में 20 हजार किलोमीटर नहरों की खुदाई और पुनर्खुदाई का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत पिछले तीन महीनों में ही करीब 900 किलोमीटर नहरों का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा पद्मा बैराज परियोजना पर भी काम शुरू हो गया है, जिसका उद्देश्य मानसून के अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर सूखे के दौरान किसानों तक पहुंचाना है।
किसानों के लिए राहत और नई योजनाएं
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने सत्ता संभालने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक में लगभग 13 लाख किसानों के 10 हजार टका तक के कृषि ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज को माफ करने का निर्णय लिया था।
इसके साथ ही किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष किसान कार्ड योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 2,500 टका की आर्थिक मदद मिलेगी, साथ ही 10 अतिरिक्त सरकारी लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य अगले वित्तीय वर्ष में लगभग 43 लाख किसानों तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है।
जल प्रबंधन से आगे, रणनीतिक महत्व की परियोजना
बांग्लादेश सरकार तीस्ता बैराज मास्टर प्लान को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के आर्थिक विकास की आधारशिला बता रही है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना जल संसाधन प्रबंधन के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीति, भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा और दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती सक्रियता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से भी जुड़ी हुई है।



