उत्तर प्रदेशराज्य

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, SIT ने चंपत राय से बंद कमरे में की लंबी पूछताछ; आज से शुरू होगा बयान दर्ज करने का सिलसिला

अयोध्या: श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच के पहले दिन टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से बंद कमरे में करीब एक घंटे तक विस्तृत बातचीत की और मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। मंगलवार से औपचारिक पूछताछ और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

सोमवार को एसआईटी दोपहर से देर रात तक मंदिर परिसर में मौजूद रही। टीम ने सबसे पहले तीर्थयात्री सुविधा केंद्र स्थित गणनास्थल का निरीक्षण किया और वहां की निगरानी व्यवस्था तथा चढ़ावे की गिनती से जुड़े सिस्टम की जानकारी जुटाई।

चंपत राय से अकेले में जुटाई गई अहम जानकारी

जांच के दौरान एसआईटी अधिकारियों ने पूरी स्थिति को समझने के लिए ट्रस्ट महासचिव चंपत राय से अकेले में विस्तृत चर्चा की। बातचीत के दौरान तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था। अधिकारियों ने कई अभिलेखों की जांच की और जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।

शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार को शामिल किया गया है।

पहले दिन जांच से दूर रहे गोपाल राव

जांच के पहले दिन मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री गोपाल राव को एसआईटी की कार्यवाही से अलग रखा गया। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाकर तथ्यों का मिलान करना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को कई प्रयासों के बावजूद गोपाल राव को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए एसआईटी मंदिर परिसर में ही अस्थायी कार्यालय स्थापित करने की संभावनाएं भी तलाश रही है, हालांकि अभी तक उपयुक्त स्थान तय नहीं हो सका है।

एक सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट, 15 दिन में पूरी जांच

एसआईटी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रदेश सरकार को सौंपनी है, जबकि विस्तृत जांच रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करनी होगी। फिलहाल जांच अधिकारी शुरुआती तथ्यों को जुटाकर संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।

जांच के पहले चरण में यह पता लगाया जाएगा कि चोरी की घटना वास्तव में हुई है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भी जांच होगी कि चोरी कब से हो रही थी, इसका तरीका क्या था और अनुमानित रूप से कितनी धनराशि या अन्य मूल्यवान वस्तुएं गायब हुईं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मामला केवल नकदी तक सीमित है या श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषण भी इसमें शामिल हैं।

दूसरे चरण में होंगे बयान और जिम्मेदारियों की पड़ताल

जांच के अगले चरण में एसआईटी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और कथित घटना में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल करेगी। इसके बाद टीम अपनी सिफारिशों के साथ व्यवस्थागत खामियों और उन्हें दूर करने के उपायों को भी अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा बनाएगी।

जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी: नृपेंद्र मिश्र

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदेन सदस्य और भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि एसआईटी को जांच के दौरान आपराधिक और सुधारात्मक दोनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देना होगा। उनका कहना है कि जांच के निष्कर्षों में दोनों पहलुओं का समावेश होने पर ही जनता का विश्वास मजबूत रहेगा।

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा निरंतर चलती रहती है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि दान देने के बाद उसे भूल जाने की परंपरा रही है।

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