देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश में अगले छह महीने के लिए अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय आगामी महीनों में संभावित कर्मचारी आंदोलनों और आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
कर्मचारी आंदोलनों के बीच लिया गया फैसला
कार्मिक विभाग के सचिव शैलेश बगौली द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य में अगले छह महीने तक हड़ताल पर रोक रहेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठन आठवें वेतनमान से पहले पुरानी एसीपी व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी वर्ष को देखते हुए इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर आयोग कार्यालय पर प्रदर्शन
इसी बीच माध्यमिक सहायक अध्यापक भर्ती में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आयोग के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और भर्ती प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की। इसके बाद आयोग ने शेष पदों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में शामिल हुए।
जनशिकायतों में लापरवाही पर सख्त हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पेयजल विभाग से सबसे अधिक शिकायतें मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि संतोषजनक सुधार नहीं होने पर जल जीवन मिशन और पेयजल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शून्य निस्तारण वाले अधिकारियों को नोटिस के निर्देश
मुख्यमंत्री ने 18 अप्रैल से 28 जुलाई के बीच सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त 67,843 शिकायतों की समीक्षा की। इस दौरान जिन अधिकारियों के स्तर पर शिकायतों का निस्तारण शून्य प्रतिशत पाया गया, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। समीक्षा में वन विभाग, पर्यावरण बोर्ड, उच्च शिक्षा निदेशालय तथा सूचना एवं संस्कृति विभाग के पांच अधिकारियों की शिकायत निस्तारण स्थिति शून्य पाई गई।
अधिकारियों से मांगे नवाचार के सुझाव
मुख्यमंत्री ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों से अपने शुरुआती कार्यकाल वाले क्षेत्रों में जनसुविधाओं से जुड़े नवाचारों के सुझाव 50 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही भूमि विवादों के प्राथमिकता के आधार पर समाधान और प्रत्येक सोमवार को समाधान दिवस आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
रिटायर कर्मचारियों की पेंशन समय पर देने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पहले ही महीने से पेंशन मिलनी चाहिए। उन्होंने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि पेंशन जारी करने में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
शिकायतकर्ताओं से सीधे की बात
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई शिकायतकर्ताओं से फोन पर बात कर समस्याओं की स्थिति जानी। अल्मोड़ा, टिहरी और हरिद्वार के शिकायतकर्ताओं से बातचीत के दौरान संबंधित जिलों के अधिकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए गए।
गलत तरीके से बंद की गईं हजारों शिकायतें
समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों को मनमाने ढंग से बंद कर दिया गया या अनुचित तरीके से दूसरी श्रेणी में डाल दिया गया। कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतें गलत तरीके से बंद किए जाने का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।




