व्यापार

RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव, लाखों कर्जदारों को राहत, EMI रहेगी स्थिर

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का ऐलान किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋण लेने वाले लाखों लोगों को राहत मिली है, क्योंकि उनकी मासिक किस्तों (EMI) पर फिलहाल किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।

गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं का दौर जारी है और कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियां स्थिर गति से आगे बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का फैसला लिया गया है।

लगातार कटौती के बाद दरों पर लगा विराम

भारतीय रिजर्व बैंक फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 आधार अंकों की कटौती कर चुका है। हालांकि पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद से ब्याज दरों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकों की उधारी लागत में भी कोई तत्काल परिवर्तन नहीं होगा।

महंगाई अभी भी लक्ष्य से नीचे

आरबीआई के अनुसार अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई, लेकिन यह अब भी केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से नीचे है। यही कारण है कि महंगाई को लेकर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर भी अच्छी खबर

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। उन्होंने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कार्यक्रम को भी सफल बताया और कहा कि इससे निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं।

महंगाई को लेकर RBI का नया अनुमान

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत रखा है। यह पहले के अनुमान की तुलना में लगभग 50 आधार अंक अधिक है।

केंद्रीय बैंक के अनुमान के अनुसार पहली तिमाही में महंगाई 4.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.4 प्रतिशत रह सकती है। वहीं पूरे वित्त वर्ष के दौरान कोर महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

EMI पर क्या होगा असर?

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा मतलब है कि फिलहाल बैंकों द्वारा लोन पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। ऐसे में मौजूदा कर्जदारों की EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा और नए ऋण लेने वालों को भी स्थिर ब्याज दरों का लाभ मिल सकता है।

Related Articles

Back to top button