हरियाणा में लाल डोरा जमीन को लेकर बड़ा फैसला, कब्जाधारियों को मिलेगा मालिकाना हक; 90 दिन में होगा बंटवारा

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लाल डोरा भूमि के स्वामित्व अधिकारों को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 17 अगस्त को ‘हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अभिलेखन और समाधान) नियम, 2026’ की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे भूमि और संपत्ति विवादों के त्वरित समाधान का रास्ता साफ हुआ है।
कब्जाधारियों को मिलेगा स्वामित्व अधिकार प्रमाण-पत्र
नए नियमों के तहत अंतिम अधिकार अभिलेख में दर्ज वैध कब्जाधारियों को स्वामित्व अधिकार प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। इसके साथ ही गांवों की सभी संपत्तियों की पैमाइश कर उनके क्षेत्रफल का रिकॉर्ड निर्धारित सरकारी प्रारूप में दर्ज किया जाएगा। इससे संपत्ति की सीमाओं को लेकर भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
एक ही जमीन के हिस्सों की होगी अलग पहचान
अब किसी प्लॉट या मकान के उप-विभाजन की स्थिति में उसके प्रत्येक हिस्से की अलग और स्पष्ट पहचान दर्ज की जाएगी। इससे संपत्ति के अलग-अलग हिस्सों के रिकॉर्ड को लेकर बनी अस्पष्टता दूर होगी और संबंधित हिस्सेदारों के अधिकारों का रिकॉर्ड स्पष्ट रहेगा।
90 दिन में निपटाना होगा बंटवारे का मामला
नए नियमों में सह-स्वामियों के बीच आपसी बंटवारे के मामलों के निपटारे के लिए समय सीमा भी तय की गई है। ऐसे मामलों को अधिकतम 90 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा। इससे लंबे समय तक लंबित रहने वाले बंटवारे के मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।
सर्वेक्षण चिह्नों को नुकसान पहुंचाने पर लगेगा जुर्माना
भूमि की पैमाइश और नक्शा तैयार करने के दौरान लगाए जाने वाले सर्वेक्षण चिह्नों की सुरक्षा के लिए भी नियमों में प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति इन चिह्नों को नुकसान पहुंचाता है या उन्हें नष्ट करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।
सरकार के मुताबिक, नए नियमों से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों के खरीद-बिक्री के काम, ऋण लेने और मालिकाना हक साबित करने में लोगों को सुविधा मिलेगी। साथ ही जमीन की पहचान और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकेंगे।



