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37 साल पुराने शेयर ट्रांसफर विवाद में नोएल टाटा को बड़ी राहत, 833 शेयरों पर शिकायत चैरिटी कमिश्नर ने की खारिज

मुंबई: टाटा समूह से जुड़े 37 साल पुराने शेयर हस्तांतरण विवाद में नोएल टाटा को बड़ी कानूनी राहत मिली है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने वर्ष 1989 में हुए 833 शेयरों के हस्तांतरण को लेकर दर्ज शिकायत खारिज कर दी है। आदेश में कहा गया है कि उस समय शेयरों का हस्तांतरण लागू कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया था। ऐसे में इस लेनदेन की आगे जांच कराने की जरूरत नहीं है।

नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के 833 शेयरों से जुड़ा था विवाद

मामला नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से किए गए 833 शेयरों के हस्तांतरण से संबंधित था। ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह ने इस पुराने लेनदेन पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उनका तर्क था कि शेयरों के हस्तांतरण की अलग से जांच होनी चाहिए।

महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने शिकायत पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। आदेश के मुताबिक, शेयरों का हस्तांतरण उस समय लागू कानूनी नियमों के अनुसार हुआ था। इसलिए अब इस पुराने लेनदेन की दोबारा जांच कराने का कोई आधार नहीं है।

टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच खींचतान के बीच आया फैसला

चैरिटी कमिश्नर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। इसी माहौल में 1989 के शेयर हस्तांतरण का यह मामला भी चर्चा में आया था।

फैसले के बाद ट्रस्ट की ओर से शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया। ट्रस्ट ने कहा कि इस मामले के जरिए संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

विजय सिंह के आचरण पर भी चैरिटी कमिश्नर की टिप्पणी

चैरिटी कमिश्नर ने अपने आदेश में शिकायतकर्ता और ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह के आचरण पर भी टिप्पणी की है। आदेश के अनुसार, सिंह 8 जून को हुई बोर्ड बैठक में शामिल हुए थे। इस बैठक में ट्रस्ट की ओर से मामले में अपना पक्ष रखने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

इसके बावजूद दो दिन बाद, 10 जून को विजय सिंह ने कथित तौर पर अलग शिकायत दर्ज कराई। चैरिटी कमिश्नर ने उनके इस कदम को नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर अशोभनीय बताया।

शिकायत खारिज होने से मामले में आगे की जांच पर भी विराम

चैरिटी कमिश्नर के आदेश के बाद 37 साल पुराने 833 शेयरों के हस्तांतरण को लेकर उठाए गए सवाल फिलहाल खत्म हो गए हैं। आदेश में लेनदेन को उस समय के कानूनी प्रावधानों के अनुरूप माना गया है। इसके साथ ही इस मामले में आगे स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी खारिज हो गई है। इससे नोएल टाटा को इस पुराने शेयर हस्तांतरण विवाद में राहत मिली है।

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