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दिल्ली के रेहड़ी-पटरी वालों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जब्त सामान का 24 घंटे में देना होगा मेमो; पूरी कार्रवाई की होगी वीडियोग्राफी

नई दिल्ली: दिल्ली के रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडर्स को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम दिल्ली (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) को निर्देश दिया है कि किसी स्ट्रीट वेंडर का सामान जब्त करने के बाद 24 घंटे के भीतर उसका जब्ती मेमो देना होगा। अदालत ने पूरी जब्ती प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का भी आदेश दिया है।

यह आदेश ‘रेहड़ी-पटरी एकता मंच’ की जनहित याचिका पर 10 सितंबर को दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नियमों के उल्लंघन के नाम पर सामान जब्त किए जाने के बावजूद MCD और NDMC की ओर से वेंडर्स को जब्ती मेमो नहीं दिया जाता। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने की।

मेमो में देनी होगी जब्त सामान की पूरी जानकारी

हाईकोर्ट ने कहा कि जब्ती के दौरान तैयार किए जाने वाले मेमो में जब्ती की तारीख, जब्त किए गए सामान की पूरी सूची, सामान को रखने की जगह और संबंधित शेल्फ नंबर समेत अन्य जरूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए। इसके साथ ही जब्ती की कार्रवाई से जुड़े अधिकारी का विवरण भी मेमो में देना होगा।

अगर जब्ती के बाद कोई जुर्माना लगाया जाता है तो उसकी जानकारी और संबंधित अधिकारी का विवरण भी स्ट्रीट वेंडर को उपलब्ध कराना जरूरी होगा।

क्या था रेहड़ी-पटरी वालों का आरोप?

याचिका में कहा गया था कि MCD और NDMC द्वारा सामान जब्त किए जाने के बाद वेंडर्स को उसकी सूची नहीं दी जाती। उन्हें केवल जुर्माना भरने की रसीद थमा दी जाती है। इससे वेंडर्स के पास यह पता लगाने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं रहता कि उनका कौन-कौन सा सामान जब्त किया गया है और उसे कहां रखा गया है।

MCD-NDMC ने कोर्ट में क्या दलील दी?

MCD और NDMC की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कई बार सामान एक खास समय पर जब्त किया जाता है। यदि अधिकारी उसी समय मौके पर जब्ती मेमो तैयार करने लगें तो दूसरे वेंडर्स को इसकी जानकारी हो जाती है और वे कार्रवाई से बचकर निकल सकते हैं।

दोनों निकायों के वकीलों ने बताया कि आम तौर पर पहले सामान जब्त किया जाता है और बाद में शाम को जब्ती मेमो तथा जुर्माने की रसीद तैयार की जाती है। जब्त सामान को संबंधित वेयरहाउस में रखा जाता है और उसके लिए निर्धारित शेल्फ होती है। वेंडर को दी जाने वाली रसीद पर शेल्फ नंबर दर्ज रहता है और जुर्माना जमा करने के बाद सामान वापस कर दिया जाता है।

2014 के कानून का पालन करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि MCD और NDMC से ‘स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका की सुरक्षा और स्ट्रीट वेंडिंग का नियमन) एक्ट, 2014’ की धारा 19 का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। इस प्रावधान के तहत जब्त सामान की सूची तैयार करना और उसकी एक प्रति वेंडर को देना जरूरी है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मौके पर जब्ती मेमो तैयार करना संभव नहीं है तो सामान जब्त किए जाने के 24 घंटे के भीतर मेमो जारी करना होगा। साथ ही पूरी जब्ती प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी अनिवार्य होगी।

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