645 करोड़ के बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा! CBI डायरी में 7 IAS अफसरों के नाम, 2 गिरफ्तार, 5 पर कार्रवाई की आहट

चंडीगढ़: हरियाणा के चर्चित 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नौकरशाही के भीतर हलचल तेज होती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार जांच डायरी और संदिग्धों के बयानों में सात आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से दो को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य अधिकारियों पर भी जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है।
दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
इस मामले में CBI अब तक दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त रहे राम कुमार सिंह शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने करीब 79.46 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को नियमों के विपरीत निजी बैंक में स्थानांतरित किया और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए धन को शेल कंपनियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
दूसरे गिरफ्तार अधिकारी वर्ष 2000 बैच के आईएएस पंकज अग्रवाल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के खातों से 60.54 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की कोशिश भी चर्चा में
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि मामले से जुड़े एक संदिग्ध आईएएस अधिकारी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने का प्रयास किया था। हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं मिली। सूत्रों का दावा है कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी हुई है।
17A के तहत जांच को मिली मंजूरी
हरियाणा सरकार पहले ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत CBI को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और आवश्यक कार्रवाई की अनुमति दे चुकी है। इसके बाद एजेंसी ने जांच की रफ्तार और तेज कर दी है।
सरकारी फंड को निजी बैंकों में पहुंचाने का आरोप
CBI और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार घोटाले का मुख्य आधार सरकारी धन का कथित अवैध हस्तांतरण था। आरोप है कि वित्तीय नियमों को दरकिनार कर आठ सरकारी विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन की रकम निजी बैंकों की शाखाओं में जमा कराई गई।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अधिकारियों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी फंड को वैध निवेश के बजाय शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। आशंका जताई जा रही है कि बाद में इस धन का इस्तेमाल रियल एस्टेट और निजी संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया।
अब 5 अन्य अधिकारियों पर नजर
जांच एजेंसियां इस मामले में पहले ही 17 से अधिक आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और कथित बिचौलिए शामिल हैं। अब CBI की नजर उन अन्य अधिकारियों पर है जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में पूछताछ, छापेमारी और अन्य कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है।



