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JPSC परीक्षा घोटाले में CID का बड़ा खुलासा, ITI की आड़ में 2024 से ही काम कर रही थी TDPL; फर्जी कंपनियों से रची गई चयन की कहानी

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी की चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, टीडीपीएल कंपनी जेपीएससी में आधिकारिक तौर पर काम मिलने से पहले ही आईटीआई लिमिटेड की आड़ में परीक्षा संचालन से जुड़ी हुई थी। इतना ही नहीं, जून 2025 में कंपनी को काम देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सीआईडी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी के चयन के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का दिखावा किया गया और दो अन्य कंपनियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए थे।

2024 से ही ITI की आड़ में काम कर रही थी TDPL

सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार, जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के संचालन के लिए शुरुआत में आईटीआई लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि आईटीआई ने यह काम आगे टीडीपीएल कंपनी को सौंप दिया था।

जांच में क्रिरीट नाम की एक कंपनी का भी जिक्र हुआ है। बताया गया है कि टीडीपीएल के कहने पर इस कंपनी के प्रतिनिधि तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा से काम के सिलसिले में मिले थे। हालांकि, उस समय निजी कंपनी के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईटीआई लिमिटेड से काम कराने की बात सामने आई।

इसके बाद टीडीपीएल से जुड़े लोग आईटीआई के दस्तावेज लेकर नंदलाल नाम के स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से जेपीएससी के चेयरमैन से संपर्क करने पहुंचे थे। बाद में आईटीआई के नाम पर काम मिलने के बाद इसे टीडीपीएल को सौंप दिया गया। कंपनी की ओर से कृष्णा नाम के अभियुक्त को जेपीएससी में कामकाज के लिए अधिकृत किया गया था।

सीआईडी की जांच के मुताबिक, इस तरह टीडीपीएल वर्ष 2024 से ही आईटीआई की आड़ में परीक्षा संचालन से जुड़ी हुई थी। बाद में आईटीआई लिमिटेड के हटने के बाद 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के साक्षात्कार और अंतिम परिणाम तैयार करने का काम भी टीडीपीएल ने किया था।

10 लाख से ज्यादा के काम के लिए टेंडर जरूरी, फिर सीधे कैसे मिला ठेका?

सीआईडी की चार्जशीट में टीडीपीएल को काम आवंटित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वित्त विभाग की ओर से वर्ष 2024 में जारी अधिसूचना के तहत राज्य में झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल लागू था। जून 2025 में जब टीडीपीएल को काम दिया गया, तब भी यही नियम प्रभावी था।

इस मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार, 10 लाख रुपये से अधिक के काम के लिए खुली निविदा जारी करना अनिवार्य था। इसके बावजूद टीडीपीएल को बिना खुली निविदा के सीधे काम सौंप दिया गया।

सीआईडी का कहना है कि किसी भी कंपनी का चयन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए और सभी इच्छुक कंपनियों को समान अवसर मिलना चाहिए। लेकिन जांच में सामने आया कि टीडीपीएल के चयन के लिए केवल प्रतियोगिता का दिखावा किया गया। इसके लिए दो अन्य कंपनियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी कागजात तैयार किए गए थे।

दो कंपनियों के निदेशक ने खोली चयन प्रक्रिया की पोल

सीआईडी ने टीडीपीएल के अलावा निविदा प्रक्रिया में शामिल दिखाई गई दो अन्य कंपनियों एएलपीएस सॉल्यूशन और नेव असेसमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक से भी पूछताछ की। जांच में सामने आया कि दोनों कंपनियों के निदेशक एक ही व्यक्ति गौरव भूटानी हैं।

सीआईडी को दिए गए अपने बयान में गौरव भूटानी ने बताया कि उनकी कंपनियों की ओर से जेपीएससी के किसी भी टेंडर में शामिल होने के लिए प्रस्ताव पत्र नहीं दिया गया था।

सीआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों कंपनियों को निविदा प्रक्रिया में शामिल दिखाने का उद्देश्य उन्हें सूचीबद्ध करने और टीडीपीएल के चयन के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार करना था। जांच एजेंसी ने इसे चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जुड़ा अहम तथ्य माना है।

चार्जशीट में परीक्षा संचालन से लेकर अंतिम परिणाम तक का जिक्र

सीआईडी की जांच में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के संचालन, एजेंसी को काम सौंपने की प्रक्रिया और अंतिम परिणाम तैयार करने तक की भूमिका की पड़ताल की गई है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि टीडीपीएल वर्ष 2024 से आईटीआई लिमिटेड के माध्यम से काम कर रही थी और बाद में परीक्षा के साक्षात्कार तथा अंतिम परिणाम तैयार करने में भी उसकी भूमिका रही।

इस खुलासे के बाद जेपीएससी परीक्षा संचालन के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सीआईडी की चार्जशीट में दर्ज तथ्यों से साफ है कि जांच का एक प्रमुख पहलू टीडीपीएल को काम दिए जाने की प्रक्रिया और अन्य कंपनियों को कथित तौर पर प्रतिस्पर्धा में शामिल दिखाने से जुड़ा है।

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