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सिंगरौली के DMF फंड पर बड़ा बवाल! 1100 करोड़ रुपये दूसरे जिलों में भेजने का आरोप, जांच और जवाबदेही की मांग तेज

सिंगरौली: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) निधि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी ने आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान सिंगरौली को मिलने वाली करीब 1100 करोड़ रुपये की राशि अन्य जिलों को आवंटित कर दी गई। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।

राजेश सोनी का कहना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित निधि का बड़ा हिस्सा जिले से बाहर भेजा गया, जबकि सिंगरौली के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उनका आरोप है कि जिस राशि का उपयोग स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए था, वह अन्य जिलों में खर्च कर दी गई।

दस्तावेजों के हवाले से लगाया बड़ा आरोप

सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में राजेश सोनी ने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में सिंगरौली के DMF फंड से लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदेश के विभिन्न जिलों को हस्तांतरित की गई। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए किया जाना चाहिए था।

सिंगरौली भुगते प्रदूषण, लाभ उठाएं दूसरे जिले?

राजेश सोनी ने कहा कि सिंगरौली लंबे समय से खनन गतिविधियों के कारण प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। चितरंगी, देवसर और अन्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के कई गांवों में आज भी स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता नहीं है। वहीं जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला और फ्लाई ऐश के परिवहन से जिले की सड़कों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है, लेकिन स्थानीय विकास के लिए निर्धारित राशि का उपयोग जिले के बाहर किया जा रहा है।

कई जिलों को करोड़ों रुपये हस्तांतरित होने का दावा

पत्रकार वार्ता में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, DMF निधि से सीहोर, पन्ना, निवाड़ी, डिंडोरी, सागर, भोपाल, जबलपुर, बालाघाट, खरगोन, मंदसौर, अनूपपुर, आगर मालवा, छिंदवाड़ा, दतिया, दमोह, इंदौर, रायसेन, बड़वानी, टीकमगढ़, नीमच, अशोकनगर, शाजापुर, अलीराजपुर, रीवा और सीधी सहित कई जिलों को करोड़ों रुपये की राशि हस्तांतरित की गई।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

राजेश सोनी ने कहा कि DMF निधि की मूल अवधारणा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद यदि निधि का उपयोग अन्य जिलों में किया गया है तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिंगरौली के हितों से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर किसी भी स्तर पर प्रभावी विरोध दर्ज नहीं कराया गया। उनका कहना है कि यदि पूरी राशि जिले में खर्च होती तो स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देते।

15 दिन में राशि लौटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

आम आदमी पार्टी नेता ने मांग की कि सिंगरौली से स्थानांतरित की गई DMF निधि को 15 दिनों के भीतर वापस जिले के खाते में जमा कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में ग्रामीणों, आदिवासियों, युवाओं और आम नागरिकों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी, ताकि DMF निधि के उपयोग और इसके हस्तांतरण की वैधानिकता की न्यायिक जांच कराई जा सके। पत्रकार वार्ता में आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला विंग) अनिता बैस और प्रदेश संयुक्त सचिव श्याम सुंदर विश्वकर्मा भी मौजूद रहे।

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